Monday, November 19, 2018

गे सेक्स पर उपन्यास लिखने पर मिली 10 साल की सज़ा

गे सेक्स पर आधारित उपन्यास लिखने और बेचने के लिए चीन की एक लेखिका को 10 साल की सज़ा सुनाई गई है.

लिउ नाम की लेखिका को अन्हुई प्रांत की एक अदालत ने पिछले महीने 'अश्लील सामग्री' लिखने और उसे बेचने पर जेल भेजा.

'ऑक्युपेशन' नाम का उपन्यास 'पुरुषों के समलैंगिक संबंधों पर आधारित है, जिसमें उत्पीड़न समेत घटिया सेक्शुअल एक्ट्स के बारे में लिखा गया है.'

लेकिन उनकी सज़ा की अवधि लंबी होने से चीन के सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया जा रहा है .

बीजिंग न्यूज़ के अनुसार, इंटरनेट पर तियां यी कहलाने वाली लिउ ने कोर्ट में एक अपील दायर की है.

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'ये बहुत ज्यादा हो गया'
स्थानीय समाचार वेबसाइट, वुहू न्यूज़ के अनुसार, 31 अक्टूबर को लिउ को वुहू के पीपल्स कोर्ट ने 'अश्लील सामग्री' को फ़ायदे के लिए लिखने और बेचने के लिए सजा सुनाई गई.

हालांकि सुनवाई के ब्यौरे चीनी मीडिया में इसी हफ़्ते सामने आए.

लिउ का उपन्यास जब ऑनलाइन माध्यम पर लोकप्रिय होने लगा तो पुलिस अधिकारियों को इसकी ख़बर दी गई.

सरकारी न्यूज़ संस्था 'ग्लोबल टाइम्स' के मुताबिक, लिउ की किताब 'ऑक्युपेशन' और अन्य कामुक उपन्यासों की 7,000 से अधिक प्रतियां बिकी, जिस पर उन्हें डेढ़ लाख युआन यानी लगभग 15 लाख 46 हजार रुपये का फ़ायदा हुआ.

लेकिन कई सोशल मीडिया यूज़र्स का मानना है कि इसके लिए उन्हें जो सज़ा दी गई वो बहुत ज्यादा है.

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सोशल मीडिया अकाउंट वीबो पर एक यूज़र ने कहा, ''एक उपन्यास के लिए 10 साल? ये बहुत ज्यादा हो गया.''

एक यूज़र ने 2013 की एक घटना का हवाला दिया, जिसमें एक पूर्व अधिकारी को चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने पर आठ साल की सजा सुनाई गई थी.

वीबो पर एक अन्य यूज़र ने लिखा, "जो बलात्कार के लिए दोषी पाए गए उन्हें 10 साल से कम की सजा मिलती है. इस लेखिका को 10 साल की सजा मिली. "

Friday, November 16, 2018

आंध्र सरकार की इजाजत के बगैर राज्य में किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर पाएगी सीबीआई

आंध्र प्रदेश सरकार ने उस समझौते से अपनी आम सहमति वापस ले ली है, जिसके तहत सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) को राज्य में कार्रवाई का अधिकार मिला हुआ था। राज्य की प्रधान सचिव एआर अनुराधा द्वारा 8 नवंबर को जारी किया गया एक गोपनीय सरकारी आदेश गुरुवार रात लीक होने के बाद इस फैसले का पता चला।

इसी साल अगस्त में दी थी आंध्र ने सहमति
आदेश में कहा गया कि दिल्ली पुलिस स्थापना कानून 1946 की धारा 6 के तहत दिल्ली पुलिस से जुड़े सदस्यों को आंध्र प्रदेश में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की जो आम सहमति दी गई थी, वो वापस ली जाती है।

देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी के नियमों के मुताबिक, दिल्ली सीबीआई के पूर्ण अधिकार क्षेत्र में आती है। लेकिन, दूसरे राज्यों में एजेंसी वहां की सरकारों की आम सहमति के आधार पर ही कार्रवाई कर सकती है

आंध्र सरकार ने दिल्ली पुलिस स्थापना कानून के तहत इसी साल अगस्त में सीबीआई को राज्य में कार्रवाई करने के लिए आम सहमति दी थी।

एनडीए से अलग होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू आरोप लगा रहे थे कि केंद्र सरकार सीबीआई को अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

ममता ने किया फैसले का समर्थन
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू ने अपने राज्य में सीबीआई को कार्रवाई करने से रोकने का फैसला किया है और ये सही कदम है।

रिश्वतखोरी विवाद में सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की भूमिका की जांच से जुड़ी केंद्रीय सतर्कता अायोग (सीवीसी) की रिपोर्ट पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीवीसी से कहा कि वह सीलबंद लिफाफे में अपनी जांच रिपोर्ट वर्मा को सौंपे। शीर्ष अदालत ने कहा कि आलोक वर्मा के खिलाफ कुछ आरोपों पर सीवीसी ने प्रतिकूल बातें कही हैं। कुछ पहलुओं पर आगे जांच करने की जरूरत है। अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के रिश्वतखोरी विवाद में फंसने के बाद केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को ज्वाइंट डायरेक्टर नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त कर दिया था। जांच जारी रहने तक सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और नंबर दो अफसर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया था। छुट‌्टी पर भेजे जाने के खिलाफ आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी से जांच करने को कहा था।

Tuesday, November 6, 2018

10 साल की जेल काटने के बाद आरोप से बरी हुई विदेशी महिला

ऐनाबेले अनालिस्टा मलिबागो नाम की इस विदेशी महिला को ट्रायल कोर्ट से 10 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने 2014 में हाई कोर्ट में अपील की थी। अब हाई कोर्ट के फैसले से उन्हें जो राहत मिली है वह कोई मायने नहीं रखती, बस इतनी राहत है कि वह बरी हो गई हैं।

अभिनव गर्ग, नई दिल्ली
हेरोइन रखने की आरोपी एक महिला को 10 साल जेल काटने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने बरी कर दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले से न्याय व्यवस्था की सुस्त चाल पर फिर नजर जाती है। ऐनाबेले अनालिस्टा मलिबागो नाम की इस विदेशी महिला को ट्रायल कोर्ट से 10 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने 2014 में हाई कोर्ट में अपील की थी। अब हाई कोर्ट के फैसले से उन्हें जो राहत मिली है वह कोई मायने नहीं रखती, बस इतनी राहत है कि वह बरी हो गई हैं। 

इतने साल बाद बरी किए जाने के फैसले से न्याय व्यवस्था की धीमी चाल पर चिंता जरूर होती है, जिसके कारण कई बार कई निर्दोषों और विचाराधीन कैदियों को सालों जेल में गुजारने पड़ जाते हैं। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कहा कि ऐनाबेले को 15 अक्टूबर 2008 को अरेस्ट किया गया था। ऐनाबेले को स्पाइसजेट के चेक-इन काउंटर पर डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू(DRI) ने हेरोइन के साथ अरेस्ट किया था। आरोप था कि उनके ट्रॉली बैग से 1.24 किलोग्राम हेरोइन मिली थी। टेस्ट के बाद पता चला था कि बरामद पाउडर हेरोइन था, जो 35.6 फीसदी शुद्ध था। अरेस्ट के बाद ऐनाबेले का लंबा ट्रायल चला और साल 2014 में उन्हें दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई। ट्रायल चलने तक महिला पहले ही 5 साल 5 महीने की सजा काट चुकी थीं। 

इसके बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की गई औ र उसका फैसला आने में 4 साल से ज्यादा का वक्त लग गया। महिला के वकील ने हाई कोर्ट में कहा कि पूरा केस इसी बात से विकृत हो जाता है कि शिकायतकर्ता केस की आईओ यानी जांच अधिकारी थीं। आईओ ने ही लिखित शिकायत दाखिल की थी, जिसके आधार पर ऐनाबेले के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई।

जस्टिस सी हरि शंकर ने इसी आधार पर दोषी करार दिए जाने के फैसले को पलट दिया और ऐनाबेले को बरी कर दिया। जस्टिस हरि शंकर ने कहा कि जांच हमेशा निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई कि केस रजिस्टर करने वाला और आरोप लगाने वाली पुलिस अधिकारी खुद केस का जांच अधिकारी नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता है तो केस की जांच निष्पक्षता पर गंभर सवाल उठने स्वाभाविक हो जाते हैं। 

Sunday, November 4, 2018

ईरान पर अमरीकी प्रतिबंधों का असर क्या होगा?: रियलिटी चेक

आज यानी पांच नवंबर से ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध (अमरीकी समयानुसार चार नवंबर की मध्यरात्रि से) लागू हो गया है. अमरीकी प्रतिबंधों पर ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

रूहानी ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि ईरान के ख़िलाफ़ इस नई साज़िश में अमरीका सफल नहीं हो सकेगा.''

ईरान की अर्थव्यवस्था तेल के निर्यात पर निर्भर है और इस प्रतिबंध के बाद ईरान तेल नहीं बेच पाएगा.

हालांकि यूरोपियन यूनियन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों को अपना समर्थन देने की बात कही है.

लेकिन क्या ये कंपनियां इन प्रतिबंधों से प्रभावित होंगी क्योंकि यदि उन्होंने ईरान के साथ व्यापार जारी रखा तो अमरीका के साथ उनके व्यापार पर सीधा असर पड़ सकता है.

अमरीका इस साल की शुरुआत में ईरान समेत छह देशों के साथ 2015 में हुई परमाणु संधि से बाहर निकल गया था.

2015 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ जो परमाणु संधि की थी उसके तहत 2016 में अमरीका और अन्य पांच देशों से ईरान को तेल बेचने और उसके केंद्रीय बैंक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार की अनुमति मिली थी.

इस परमाणु संधि से बाहर आने की घोषणा के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक संबोधन में कहा था कि दुनिया के सभी देश ईरान से संबंध तोड़ दें.

लेकिन यूरोपीय देशों समेत अन्य देशों का मानना है कि ईरान परमाणु सौदे पर टिका हुआ है जबकि यूरोप के देशों का मानना है कि अमरीका ने परमाणु समझौते पर एकतरफ़ा रुख़ दिखाते हुए इसे तोड़ दिया.

विश्व व्यापार में अमरीका का ऐसा प्रभुत्व है कि इस घोषणा मात्र से अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने ईरान के साथ अपने व्यापार से हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं और इसकी वजह से ईरान के तेल निर्यात में गिरावट आई है.

अमरीकी प्रतिबंध कितना प्रभावी

अमरीका की इस घोषणा के तहत जो कंपनियां ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगी उन्हें अमरीका में व्यापार करने की अनुमति नहीं होगी.

इसके अलावा, उन अमरीकी कंपनियों को भी दंड भोगना पड़ेगा जो ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों के साथ बिज़नेस करती हैं.

सोमवार को बैंकिंग क्षेत्र पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे. अगस्त में सोने, बहुमूल्य धातु और मोटर वाहन क्षेत्र (ऑटोमोटिव सेक्टर) समेत कई उद्योगों को इस प्रतिबंध के घेरे में लिया गया था.

अमरीका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वो ईरान के तेल व्यापार को पूरी तरह से ख़त्म करना चाहता है, लेकिन साथ ही उसने आठ देशों को अस्थायी रूप से ईरान से तेल आयात करने के लिए कुछ समय की इजाज़त दे दी है.

एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमरीकी सहयोगी इटली, भारत, जापान और दक्षिण अफ्रीका इन आठ देशों में शामिल हैं.

यूरोपीय संघ अपनी कंपनियों के लिए ईरान के साथ व्यापार करते रहने और कड़े अमरीकी हर्जाने के भुगतान से बचने के लिए एक पेमेंट व्यवस्था लागू करने की योजना बना रहा है. इसका नाम है स्पेशल पर्पस वीईकल (एसपीवी). इस व्यवस्था में कंपनियों को अमरीकी वित्तीय प्रणाली से नहीं गुजरना पड़ेगा.

बैंक की तरह, एसपीवी, ईरान और इसके साथ व्यापार करने वाली कंपनियों के बीच लेनदेन को संभालेगा.

जब ईरान यूरोपीय यूनियन के देशों में तेल निर्यात करेगा तो तेल आयात करने वाली कंपनियां उसे एसपीवी में भुगतान करेंगी.

ईरान एसपीवी को क्रेडिट के तौर पर रखेगा और यूरोपियन यूनियन के अन्य देशों से सामान ख़रीदने के लिए इसी एसपीवी के ज़रिए उन्हें भुगतान करेगा.

यूरोपिय यूनियन ने इसे लेकर अपने क़ानून में भी बदलाव किए हैं, जो यूरोपीय यूनियन की कंपनियों को इस प्रतिबंध के मद्देनज़र अमरीका से क्षतिपूर्ति मांगने की अनुमति देता है.

हालांकि यूरोपीय यूनियन ने इस प्रतिबंध से निपटने की अपनी योजना तैयार कर ली है, बावजूद इसके कई कंपनियों पर इन प्रतिबंधों का व्यापक असर पड़ेगा.

उदाहरण के लिए, शिपिंग ऑपरेटर्स एसपीवी व्यवस्था के माध्यम से तेल ख़रीदना चाहेंगे लेकिन उसकी ढुलाई करने वाली कंपनियां जो अमरीका में अपना बिजनेस चला रही हैं, उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया तो उन्हें बहुत घाटा हो सकता है.

ईरान पर प्रतिबंधों में ढील के पक्ष में नहीं अमरीका
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ शोधकर्ता और प्रतिबंध मामलों के जानकार रिचर्ड नेफ्यू कहते हैं, "ईरानी अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर अमरीकी वित्त प्रणाली पर निर्भर नहीं है."

"लेकिन मुद्दा यह है कि ईरान के साथ बड़े स्तर पर व्यापार करने वाले कई देश यह ख़तरा मोल भी लेना चाहते हैं."

वो कहते हैं कि बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी और मझोली कंपनियां के इस एसपीवी व्यवस्था के ज़्यादा इस्तेमाल करने के आसार हैं.

रीड स्मिथ में अतंरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख ली हैंनसन कहते हैं, "एक और समस्या यह है कि जिन उत्पादों को एसपीवी के जरिए ईरान को बेचा जाएगा उन पर भी दूसरे स्तर का प्रतिबंध लगाया जा सकता है."