रविवार 30 दिसंबर 2018 की रात बिग बॉस 12 के विजेता के नाम का ऐलान हो गया. टेलीविजन एक्टर दीपिका कक्कड़ रियलिटी शो बिग बॉस 12 फ़िनाले की विजेता रहीं. उन्होंने बेहद कड़े मुक़ाबले में भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे एस श्रीसंत को हराया. इनाम के तौर पर दीपिका को 30 लाख रुपए मिले.
कार्यक्रम के मेज़बान सलमान ख़ान ने दीपिका की जीत की घोषणा की. तीसरे नंबर पर रहे बिहार से आए गायक दीपक ठाकुर, जो 20 लाख रुपये की रकम लेकर शो से बाहर हुए.
दीपिका कक्कड़ बहुत पॉपुलर अभिनेत्री और मॉडल हैं. 'बिग बॉस 12' में आने से पहले दीपिका कक्कड़ ने कलर्स चैनल के धारावाहिक 'ससुराल सिमर का' में सिमर की भूमिका निभाई थी. दर्शक इन्हें सिमर की भूमिका में खूब पसंद करते थे.
'ससुराल सिमर का' से पहले दीपिका ने 'नीर भरे तेरे नैना' और 'अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो' में भी काम किया था. दीपिका के पिता सेना में थे. 2018 में जे पी दत्ता की फिल्म 'पलटन' से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया और फ़िल्म में उनके काम की सराहना भी हुई थी.
2009 में दीपिका ने अपने को-एक्टर रौनक सैमसन से शादी की थी लेकिन ये शादी 3 साल ही चली. उन्होंने इस बात को छिपाकर रखा था.
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दीपिका 'ससुराल सिमर का' के साथी एक्टर शोएब इब्राहिम के साथ 2015 से रिलेशनशिप में थी और उन्होंने 22 फ़रवरी 2018 को इस्लाम अपनाते हुए उनसे निकाह किया था. शोएब ने उनके ऑनस्क्रीन पति प्रेम का किरदार निभाया था. सेट पर इनका प्यार परवान चढ़ा और कुछ साल डेटिंग करने के बाद दोनों शादी के बंधन में बंध गए.
बिग बॉस 12 के घर में दीपिका कक्कड़ को बेहद इमोशनल माना जाता रहा, पर वो असल ज़िन्दगी में भी इमोशनल हैं. दरअसल, दीपिका के पति शोएब की बहन सबा का बर्थडे 24 दिसंबर को था. दीपिका तो कई महीनों से बिग बॉस के घर में कैद थीं, इस बात को समझते हुए उन्होंने सबा के लिए पहले ही गिफ्ट में एक प्यारी-सी ड्रेस ले ली थी और शोएब को दे दी थी. सबा अपनी भाभी का गिफ्ट और प्यार देखकर बेहद खुश हो गईं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस बात को शेयर भी किया.
दीपिका ने शोएब इब्राहिम के साथ शादी के बाद अपना नाम दीपिका कक्कड़ इब्राहिम कर लिया था. दीपिका ने शादी के बाद इस्लाम के तहत अपना नाम फ़ैज़ा में बदला. दीपिका डांस रियलिटी शो 'झलक दिखलाजा 8 ' की कंटेस्टेंट भी रह चुकी हैं. वो अपने पति शोएब इब्राहिम के साथ 2017 में नच बलिये 8 में भी दिखी थी.
Monday, December 31, 2018
Wednesday, December 26, 2018
Share Market: लाल निशान पर खुला बाजार, निफ्टी 10,575 के नीचे
अमेरिकी बाजार में उथल-पुथल और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फेडरल रिजर्व पर हमले के बीच भारतीय शेयर मार्केट में भी भगदड़ मची हुई है. क्रिसमस की छुट्टी के अगले दिन शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 290 अंक तक टूट गया. वहीं निफ्टी में भी 85 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई है. सुबह 9.30 बजे सेंसेक्स 270.22 गिरकर 35,199.93 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. जबकि निफ्टी 82 अंक टूटकर 10,583 के स्तर पर आ गया.
अमेरिका में छिड़ी है जंग
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति और इकोनॉमी संभालने वाली संस्था फेडरल रिजर्व के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ी है. ट्रंप फेड के चेयरमैन पॉवेल को हटाने की कोशिश में हैं. इस लड़ाई की वजह से निवेशक चिंतित हैं और इसका असर भारतीय बाजार में भी दिख रहा है.
मंगलवार को बंद था बाजार
बता दें कि देश के प्रमुख शेयर बाजार क्रिसमस के मौके पर मंगलवार को बंद रहे. वहीं सोमवार को शेयर बाजार में नियमित कारोबार हुआ. प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 271.92 अंकों की गिरावट के साथ 35,470.15 पर और निफ्टी 90.50 अंकों की गिरावट के साथ 10,663.50 पर बंद हुआ.
बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सोमवार सुबह 117.59 अंकों की मजबूती के साथ 35,859.66 पर जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 26.9 अंकों की बढ़त के साथ 10,780.90 पर खुला था.
रुपये का ये रहा हाल
बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपये की शुरुआत बढ़त के साथ हुई. रुपया 26 पैसे की बढ़त के साथ 69.88 के स्तर पर खुला. इससे पहले रुपया पिछले कारोबारी सत्र में 2 पैसे की मामूली बढ़त के साथ 70.14 के स्तर पर बंद हुआ था.
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म में राजकुमार एक संघर्षरत गुजराती व्यवसायी के रूप में दिखेंगे और मौनी उनकी पत्नी के किरदार में दिखेंगी. गुजराती निर्देशक मिखिल मुसले की यह पहली बॉलीवुड फिल्म है. वर्ष 2016 की उनकी गुजराती थ्रिलर-फिल्म 'रॉन्ग साइड राजू' को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फीचर फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
बता दें राजकुमार राव के लिए साल 2018 सफलता के नए आयाम लेकर आया है. उनकी कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया. इनमें न्यूटन, स्त्री जैसी फिल्में शामिल हैं. साल 2019 में राजकुमार राव सोनम कपूर के साथ फिल्म एक लड़की को देखा... में नजर आने वाले हैं.
अमेरिका में छिड़ी है जंग
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति और इकोनॉमी संभालने वाली संस्था फेडरल रिजर्व के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ी है. ट्रंप फेड के चेयरमैन पॉवेल को हटाने की कोशिश में हैं. इस लड़ाई की वजह से निवेशक चिंतित हैं और इसका असर भारतीय बाजार में भी दिख रहा है.
मंगलवार को बंद था बाजार
बता दें कि देश के प्रमुख शेयर बाजार क्रिसमस के मौके पर मंगलवार को बंद रहे. वहीं सोमवार को शेयर बाजार में नियमित कारोबार हुआ. प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 271.92 अंकों की गिरावट के साथ 35,470.15 पर और निफ्टी 90.50 अंकों की गिरावट के साथ 10,663.50 पर बंद हुआ.
बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सोमवार सुबह 117.59 अंकों की मजबूती के साथ 35,859.66 पर जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 26.9 अंकों की बढ़त के साथ 10,780.90 पर खुला था.
रुपये का ये रहा हाल
बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपये की शुरुआत बढ़त के साथ हुई. रुपया 26 पैसे की बढ़त के साथ 69.88 के स्तर पर खुला. इससे पहले रुपया पिछले कारोबारी सत्र में 2 पैसे की मामूली बढ़त के साथ 70.14 के स्तर पर बंद हुआ था.
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म में राजकुमार एक संघर्षरत गुजराती व्यवसायी के रूप में दिखेंगे और मौनी उनकी पत्नी के किरदार में दिखेंगी. गुजराती निर्देशक मिखिल मुसले की यह पहली बॉलीवुड फिल्म है. वर्ष 2016 की उनकी गुजराती थ्रिलर-फिल्म 'रॉन्ग साइड राजू' को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फीचर फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
बता दें राजकुमार राव के लिए साल 2018 सफलता के नए आयाम लेकर आया है. उनकी कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया. इनमें न्यूटन, स्त्री जैसी फिल्में शामिल हैं. साल 2019 में राजकुमार राव सोनम कपूर के साथ फिल्म एक लड़की को देखा... में नजर आने वाले हैं.
Sunday, December 16, 2018
मिलिए ऐसे शेफ़ से जो इंसान नहीं रोबोट है
एक कोने में शांति से टमाटर, पनीर, चिकन और प्याज़ के एक बराबर स्लाइस काटे जा रहे हैं. दूसरे कोने में कटे हुए मांस की टिक्कियों को भूना जा रहा है. वहीं, एक और कोने में बर्गर के लिए ब्रेड को गोलाकार काटा जा रहा है. फिर इन सभी सामानों को सलीक़े से एक के ऊपर एक परत जमाकर रखा जा रहा है.
इस तैयार बर्गर के ऊपर ग्राहक की मांग के मुताबिक़, मसाले छिड़कर कर फिर इसे कड़क या हल्का सेंका जा रहा है.
पूरे काम के दौरान, चूं तक की आवाज़ नहीं आ रही है. शेफ़ साहब न चीख रहे हैं, न पुकार लगा रहे हैं. और, बिल्कुल ग्राहक की डिमांड के हिसाब से तैयार बर्गर उसकी मेज तक पहुंच रहा है.
ये हैं इक्कीसवीं सदी के शेफ़, जो हो-हल्ला नहीं करते. सामान नहीं पटकते. और एक घंटे में एक दो या चार नहीं, 120 बर्गर बनाते हैं.
इन शेफ़ का नाम है, क्रिएटर.
क्रिएटर कोई इंसान नहीं, एक रोबोट है. और ये रोबोट ख़ुद थर्मल सेंसर से चलने वाली मशीन से नियंत्रित होता है. ताकि, मांस की टिकिया बिल्कुल सटीक तरीक़े से पके, न जले, न कच्ची रह जाए.
मशीन से तैयार बर्गर
इस शेफ़ में 350 सेंसर लगे हैं और ये 20 कंप्यूटरों की मदद से चलता है. इस आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मशीन में इतना डेटा भरा गया है कि वो बर्गर को हर ग्राहक की पसंद के हिसाब से तैयार करता है.
न चीज़ ज़्यादा होता है, न प्याज़ जलता है. कितना सॉस और कितना जैम पड़ेगा, इसके आंकड़ों की भी इस में भरमार है. किसी को मेक्सिकन बर्गर चाहिए, तो वो भी मिलेगा और कोई वड़ा पाव वाला चाहे, तो वो भी क्रिएटर साहब तैयार कर देंगे.
और मशीन से तैयार इस बर्गर की क़ीमत भी आम बर्गर जैसी ही है. केवल 6 डॉलर.
क्रिएटर तैयार करने वाले कंप्यूटर इंजीनियर एलेक्स वर्डाकोस्टास कहते हैं, "रोबोट की मदद से हम काम को और बेहतर ढंग से कर पाते हैं. तेज़ी से और सटीक अंदाज़ में निपटा पाते हैं. हम मशीन के सीखने की क्षमता का इस्तेमाल कर के बिल्कुल ग्राहक की डिमांड वाली चीज़ें तैयार कर सकते हैं."
क्रिएटर का बनाया बर्गर खाने वाले इसे ताज़ा, स्वादिष्ट और एकदम सही पका हुआ कहते हैं. इससे बर्गर बनवाने का फ़ायदा है बड़ी तेज़ी से ढेर सारे बर्गर एक साथ तैयार हो सकते हैं.
यानी फास्ट फूड अब और भी फास्ट हो गया है. ये मशीन पांच मिनट में एक बर्गर तैयार कर देती है और एक साथ कई बर्गर तैयार करती है. यानी हर तीस सेकेंड में एक बर्गर बनता है.
इस तैयार बर्गर के ऊपर ग्राहक की मांग के मुताबिक़, मसाले छिड़कर कर फिर इसे कड़क या हल्का सेंका जा रहा है.
पूरे काम के दौरान, चूं तक की आवाज़ नहीं आ रही है. शेफ़ साहब न चीख रहे हैं, न पुकार लगा रहे हैं. और, बिल्कुल ग्राहक की डिमांड के हिसाब से तैयार बर्गर उसकी मेज तक पहुंच रहा है.
ये हैं इक्कीसवीं सदी के शेफ़, जो हो-हल्ला नहीं करते. सामान नहीं पटकते. और एक घंटे में एक दो या चार नहीं, 120 बर्गर बनाते हैं.
इन शेफ़ का नाम है, क्रिएटर.
क्रिएटर कोई इंसान नहीं, एक रोबोट है. और ये रोबोट ख़ुद थर्मल सेंसर से चलने वाली मशीन से नियंत्रित होता है. ताकि, मांस की टिकिया बिल्कुल सटीक तरीक़े से पके, न जले, न कच्ची रह जाए.
मशीन से तैयार बर्गर
इस शेफ़ में 350 सेंसर लगे हैं और ये 20 कंप्यूटरों की मदद से चलता है. इस आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मशीन में इतना डेटा भरा गया है कि वो बर्गर को हर ग्राहक की पसंद के हिसाब से तैयार करता है.
न चीज़ ज़्यादा होता है, न प्याज़ जलता है. कितना सॉस और कितना जैम पड़ेगा, इसके आंकड़ों की भी इस में भरमार है. किसी को मेक्सिकन बर्गर चाहिए, तो वो भी मिलेगा और कोई वड़ा पाव वाला चाहे, तो वो भी क्रिएटर साहब तैयार कर देंगे.
और मशीन से तैयार इस बर्गर की क़ीमत भी आम बर्गर जैसी ही है. केवल 6 डॉलर.
क्रिएटर तैयार करने वाले कंप्यूटर इंजीनियर एलेक्स वर्डाकोस्टास कहते हैं, "रोबोट की मदद से हम काम को और बेहतर ढंग से कर पाते हैं. तेज़ी से और सटीक अंदाज़ में निपटा पाते हैं. हम मशीन के सीखने की क्षमता का इस्तेमाल कर के बिल्कुल ग्राहक की डिमांड वाली चीज़ें तैयार कर सकते हैं."
क्रिएटर का बनाया बर्गर खाने वाले इसे ताज़ा, स्वादिष्ट और एकदम सही पका हुआ कहते हैं. इससे बर्गर बनवाने का फ़ायदा है बड़ी तेज़ी से ढेर सारे बर्गर एक साथ तैयार हो सकते हैं.
यानी फास्ट फूड अब और भी फास्ट हो गया है. ये मशीन पांच मिनट में एक बर्गर तैयार कर देती है और एक साथ कई बर्गर तैयार करती है. यानी हर तीस सेकेंड में एक बर्गर बनता है.
Thursday, December 13, 2018
Galaxy S10 लीक: कीमत, फीचर्स और कब होगा लॉन्च
सैमसंग का अगला फ्लैगशिप यानी Galaxy S10 अब जल्द ही मार्केट में होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह यह अगले महीने लॉन्च किया जाएगा. मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस बार्सिलोना में है और 20 फरवरी को ही इसे लॉन्च किया जा सकता है. इस बार कंपनी एक खास मॉडल ले कर आ सकती है, क्योंकि इस बार कंपनी अपनी 10वीं सालगिरह मना रही होगी.
Galaxy S10 में ये होंगे खास फीचर्स
रिपोर्ट्स के मुकाबिक इस स्मार्टफोन के तीन वेरिएंट्स होंगे. रेग्यूलर, प्लस और फ्लैट वर्जन. यानी इस बार कंपनी बिना कर्व्ड स्क्रीन के भी स्मार्टफोन लॉन्च करेगी.
पंच होल डिस्प्ले – इस स्मार्टफोन में Infinity O डिस्प्ले दी जाएगी जिसके टॉप कॉर्नर में डिस्प्ले के अंदर फ्रंट कैमरा होगा. मार्केट में सैमसंग और हुआवे ने ऐसे स्मार्टफोन्स का ऐलान कर दिया है, इसिलए इसमें कोई नई बात नहीं होगी.
Galaxy S10 में इस बार अंडर डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया जा सकता है. और यह भी अब नई टेक्नॉलजी नहीं है और दूसरी कंपनियां भी ऐसा कर रही हैं.
सैमसंग ने हाल ही में तीन और चार रियर कैमरे वाले स्मार्टफोन्स लॉन्च किए हैं. हालांकि खबर है कि इसमें सिर्फ तीन रियर कैमरे होंगे. इस बार फेस अनलॉक को सिक्योर करने के लिए कुछ सेंसर्स भी यूज किया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक Galaxy S10 में 6.1 इंच की स्क्रीन होगी. इसका प्लस वेरिएंट 6.4 इंच स्क्रीन वाला होगा जबकि फ्लैट स्क्रीन वाला वर्जन 5.8 इंच का होगा.
Galaxy S10 के अलग अलग सटोरेज वेरिएंट्स होंगे. इनमें 128GB, 512GBहोंगे. कीमतें भी लीक हुई हैं. 128GB वर्जन की कीमत £899 (लगभग 81,503 रुपये) हो सकती है. दूसरे वेरिएंट की कीमत £899 (लगभग 99,634 रुपये) हो सकती है. यानी इस बार कीमतों के मामलों में यह आईफोन को टक्कर दे सकता है, क्योंकि ऐसा लगता है जैसे भारत में भी यह इसी कीमत पर आएगा लाख रुपये देने ही होंगे.
Galaxy S10 में ये होंगे खास फीचर्स
रिपोर्ट्स के मुकाबिक इस स्मार्टफोन के तीन वेरिएंट्स होंगे. रेग्यूलर, प्लस और फ्लैट वर्जन. यानी इस बार कंपनी बिना कर्व्ड स्क्रीन के भी स्मार्टफोन लॉन्च करेगी.
पंच होल डिस्प्ले – इस स्मार्टफोन में Infinity O डिस्प्ले दी जाएगी जिसके टॉप कॉर्नर में डिस्प्ले के अंदर फ्रंट कैमरा होगा. मार्केट में सैमसंग और हुआवे ने ऐसे स्मार्टफोन्स का ऐलान कर दिया है, इसिलए इसमें कोई नई बात नहीं होगी.
Galaxy S10 में इस बार अंडर डिस्प्ले फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया जा सकता है. और यह भी अब नई टेक्नॉलजी नहीं है और दूसरी कंपनियां भी ऐसा कर रही हैं.
सैमसंग ने हाल ही में तीन और चार रियर कैमरे वाले स्मार्टफोन्स लॉन्च किए हैं. हालांकि खबर है कि इसमें सिर्फ तीन रियर कैमरे होंगे. इस बार फेस अनलॉक को सिक्योर करने के लिए कुछ सेंसर्स भी यूज किया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक Galaxy S10 में 6.1 इंच की स्क्रीन होगी. इसका प्लस वेरिएंट 6.4 इंच स्क्रीन वाला होगा जबकि फ्लैट स्क्रीन वाला वर्जन 5.8 इंच का होगा.
Galaxy S10 के अलग अलग सटोरेज वेरिएंट्स होंगे. इनमें 128GB, 512GBहोंगे. कीमतें भी लीक हुई हैं. 128GB वर्जन की कीमत £899 (लगभग 81,503 रुपये) हो सकती है. दूसरे वेरिएंट की कीमत £899 (लगभग 99,634 रुपये) हो सकती है. यानी इस बार कीमतों के मामलों में यह आईफोन को टक्कर दे सकता है, क्योंकि ऐसा लगता है जैसे भारत में भी यह इसी कीमत पर आएगा लाख रुपये देने ही होंगे.
Monday, December 10, 2018
बकाया पैसा नहीं मिला तो खुद को गोली मारकर दी जान
फरीदाबाद में एक व्यापारी ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली. बताया जा रहा है कि व्यापारी ने किसी शख्स को 40 लाख रुपये उधार दिए थे, लेकिन ये शख्स व्यापारी को पैसे मांगने पर वापस नही कर रहा था जिसकी वजह से ये बिजनेसमैन विजेंद्र तनाव में थे. इसी तनाव की वजह से ही बिजनेसमैन विजेंद्र ने अपनी ही लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मार खुदकुशी कर ली.
विजेंद्र की उम्र करीब साठ साल की थी. वह माईनिंग का व्यापार करते थे और फरीदाबाद के पॉश इलाके सेक्टर दस के कोठी नम्बर 412 में परिवार के साथ रहते थे. हैरत की बात है कि विजेंद्र ने खुद को घर में गोली मार ली लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी. दिन में पड़ोसी उन्हें खोजते हुए उनके घर पहुंचे तो घरवालों ने जाकर उनके कमरे में देखा जहां उनकी लाश पड़ी थी.
विजेंद्र के भाई के मुताबिक, उनके बड़े भाई का माइनिंग से जुड़ी मशीनों का काम था और उन्हें दिल्ली के कनॉट प्लेस के किसी व्यापारी से करीब 40 लाख रुपये लेने थे. इस रकम को लेने वह तीन चार दिन पहले गए थे, लेकिन कर्जदार ने विजेंद्र के साथ ठीक ढंग से व्यवहार नहीं किया. मृतक व्यापारी के भाई के मुताबिक कर्जदार ने दोबारा रुपये मांगने पर विजेंद्र को जान से मरने की धमकी दी. घरवालों का आरोप है कि इसी वजह से वह काफी परेशान चल रहे थे और इस परेशानी के चलते उन्होंने खुद को गोली मार ली.
वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और आला अधिकारी फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए फरीदाबाद के सिविल अस्पताल भिजवा दिया और मामले की छानबीन में जुट गई. पुलिस का कहना है कि परिवार की शिकायत दर्ज कर ली गई है और जांच किया जा रहा है. घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. पुलिस के मुताबिक जांच में जिसके खिलाफ सबूत मिलेंगे उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.
इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.
विजेंद्र की उम्र करीब साठ साल की थी. वह माईनिंग का व्यापार करते थे और फरीदाबाद के पॉश इलाके सेक्टर दस के कोठी नम्बर 412 में परिवार के साथ रहते थे. हैरत की बात है कि विजेंद्र ने खुद को घर में गोली मार ली लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी. दिन में पड़ोसी उन्हें खोजते हुए उनके घर पहुंचे तो घरवालों ने जाकर उनके कमरे में देखा जहां उनकी लाश पड़ी थी.
विजेंद्र के भाई के मुताबिक, उनके बड़े भाई का माइनिंग से जुड़ी मशीनों का काम था और उन्हें दिल्ली के कनॉट प्लेस के किसी व्यापारी से करीब 40 लाख रुपये लेने थे. इस रकम को लेने वह तीन चार दिन पहले गए थे, लेकिन कर्जदार ने विजेंद्र के साथ ठीक ढंग से व्यवहार नहीं किया. मृतक व्यापारी के भाई के मुताबिक कर्जदार ने दोबारा रुपये मांगने पर विजेंद्र को जान से मरने की धमकी दी. घरवालों का आरोप है कि इसी वजह से वह काफी परेशान चल रहे थे और इस परेशानी के चलते उन्होंने खुद को गोली मार ली.
वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और आला अधिकारी फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए फरीदाबाद के सिविल अस्पताल भिजवा दिया और मामले की छानबीन में जुट गई. पुलिस का कहना है कि परिवार की शिकायत दर्ज कर ली गई है और जांच किया जा रहा है. घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. पुलिस के मुताबिक जांच में जिसके खिलाफ सबूत मिलेंगे उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.
इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.
Wednesday, December 5, 2018
PM मोदी बोले- मिशेल खोलेगा अगस्ता के राज, वाड्रा पर कहा- सजा होकर रहेगी
राजस्थान में सत्ता बचाने की कोशिश में जुटी भारतीय जनता पार्टी चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत लगा रही है. राज्य में चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन है, ऐसे में बीजेपी की तरफ से उनके सबसे बड़े प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैदान में उतारा गया है. राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो रैली हैं.
सबसे पहले प्रधानमंत्री ने राजस्थान के सुमेरपुर में रैली को संबोधित किया. इसके बाद में दौसा में रैली होगी. सुमेरपुर में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में 'भारत माता की जय' के नारे लगवाए. उन्होंने जनता से पूछा कि आपको तो इस नारे में तकलीफ नहीं है ना, क्योंकि कांग्रेस के नामदार को इसमें तकलीफ है. उन्होंने कहा कि पाली में महाराणा प्रताप की माता का जन्म हुआ, यहां का एक मुट्ठी बाजरा अत्याचारियों पर भारी पड़ता है. ब्रिगेडियर हरिदेव सिंह यहां ही पैदा हुए जिन्होंने लाहौर में तिरंगा फहराया था.
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013 के चुनाव में प्रचार का आखिरी कार्यक्रम पाली में हुआ था, इस बार भी शुरुआत अलवर से और अंत पाली से हो रहा है. राजस्थान की जनता ने बीजेपी को विजय बनाने का फैसला कर लिया है. उन्होंने कहा कि अब हमारा काम एक-एक पोलिंग बूथ जीतना है, सिर्फ राजस्थान नहीं एक-एक पोलिंग बूथ जीतना है. हमारा मंत्र होना चाहिए मेरा पोलिंग बूथ-सबसे मजबूत होना चाहिए. इस सभा के बाद सभी कार्यकर्ता एक-एक मतदाता से मिलेंगे और उनके घर जाकर अधिक वोट डलवाएंगे.
PM मोदी ने रैली में कहा कि कांग्रेस वाले कहते थे कि राजस्थान में बीजेपी बचेगी नहीं, साफ हो जाएगी. दिल्ली के एयरकंडिशन कमरों में बैठकर प्रदूषण फैला रहे थे. जो लोग 2014 में मोदी को हराना चाहती थी, वो तब निराश हो गए. इसलिए वो राजस्थान में मेल बैठाना चाह रहे हैं, राजस्थान के लोगों ने भी इस हवा को चकना चूर कर दिया है. वो लोग अभी से हार का कारण बता रहे हैं कि कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई के कारण हम हार रहे हैं. कांग्रेस अब ये सोच रही है कि पराजय का ठीकरा नामदार के सिर पर ना फूटे उसके लिए क्या करें.
PM ने रैली में कहा कि कुछ लोगों ने ये भी पूछा कि मोदी की जाति कौन-सी है, कांग्रेस ने चुनाव में जातिवाद का जहर फैलाने का काम किया. कांग्रेस ने कई पाप किए हैं, तो क्या आपका भला कर सकते हैं क्या. जब कांग्रेस के प्रधानमंत्री थे, तो क्या किसान का घर सोने-चांदी का था क्या. पहले क्या किसान के घर ट्रैक्टर, उनके बच्चे विदेश में पढ़ते थे. जो काम कांग्रेस ने नहीं किया, उसका जवाब मोदी से मांगा जा रहा है. उन्होंने कहा कि पहले चार पीढ़ी का हिसाब दो, फिर चार साल का हिसाब मांगों.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नामदार बोलते हैं कि मोदी भ्रष्टाचार पर नहीं बोलते हैं, लेकिन जिन खबरों को दबा दिया जाए तो समझ लेना की नामदार मुश्किल में हैं. मैं सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ, मैंने गरीबी देखी है. देश की गरीबी के लिए एक परिवार ही जिम्मेदार है. कांग्रेस सिर्फ 'तुम भी लूटो, मैं भी लूटो' का खेल खेलती रही.
सबसे पहले प्रधानमंत्री ने राजस्थान के सुमेरपुर में रैली को संबोधित किया. इसके बाद में दौसा में रैली होगी. सुमेरपुर में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में 'भारत माता की जय' के नारे लगवाए. उन्होंने जनता से पूछा कि आपको तो इस नारे में तकलीफ नहीं है ना, क्योंकि कांग्रेस के नामदार को इसमें तकलीफ है. उन्होंने कहा कि पाली में महाराणा प्रताप की माता का जन्म हुआ, यहां का एक मुट्ठी बाजरा अत्याचारियों पर भारी पड़ता है. ब्रिगेडियर हरिदेव सिंह यहां ही पैदा हुए जिन्होंने लाहौर में तिरंगा फहराया था.
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013 के चुनाव में प्रचार का आखिरी कार्यक्रम पाली में हुआ था, इस बार भी शुरुआत अलवर से और अंत पाली से हो रहा है. राजस्थान की जनता ने बीजेपी को विजय बनाने का फैसला कर लिया है. उन्होंने कहा कि अब हमारा काम एक-एक पोलिंग बूथ जीतना है, सिर्फ राजस्थान नहीं एक-एक पोलिंग बूथ जीतना है. हमारा मंत्र होना चाहिए मेरा पोलिंग बूथ-सबसे मजबूत होना चाहिए. इस सभा के बाद सभी कार्यकर्ता एक-एक मतदाता से मिलेंगे और उनके घर जाकर अधिक वोट डलवाएंगे.
PM मोदी ने रैली में कहा कि कांग्रेस वाले कहते थे कि राजस्थान में बीजेपी बचेगी नहीं, साफ हो जाएगी. दिल्ली के एयरकंडिशन कमरों में बैठकर प्रदूषण फैला रहे थे. जो लोग 2014 में मोदी को हराना चाहती थी, वो तब निराश हो गए. इसलिए वो राजस्थान में मेल बैठाना चाह रहे हैं, राजस्थान के लोगों ने भी इस हवा को चकना चूर कर दिया है. वो लोग अभी से हार का कारण बता रहे हैं कि कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई के कारण हम हार रहे हैं. कांग्रेस अब ये सोच रही है कि पराजय का ठीकरा नामदार के सिर पर ना फूटे उसके लिए क्या करें.
PM ने रैली में कहा कि कुछ लोगों ने ये भी पूछा कि मोदी की जाति कौन-सी है, कांग्रेस ने चुनाव में जातिवाद का जहर फैलाने का काम किया. कांग्रेस ने कई पाप किए हैं, तो क्या आपका भला कर सकते हैं क्या. जब कांग्रेस के प्रधानमंत्री थे, तो क्या किसान का घर सोने-चांदी का था क्या. पहले क्या किसान के घर ट्रैक्टर, उनके बच्चे विदेश में पढ़ते थे. जो काम कांग्रेस ने नहीं किया, उसका जवाब मोदी से मांगा जा रहा है. उन्होंने कहा कि पहले चार पीढ़ी का हिसाब दो, फिर चार साल का हिसाब मांगों.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नामदार बोलते हैं कि मोदी भ्रष्टाचार पर नहीं बोलते हैं, लेकिन जिन खबरों को दबा दिया जाए तो समझ लेना की नामदार मुश्किल में हैं. मैं सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ, मैंने गरीबी देखी है. देश की गरीबी के लिए एक परिवार ही जिम्मेदार है. कांग्रेस सिर्फ 'तुम भी लूटो, मैं भी लूटो' का खेल खेलती रही.
Monday, November 19, 2018
गे सेक्स पर उपन्यास लिखने पर मिली 10 साल की सज़ा
गे सेक्स पर आधारित उपन्यास लिखने और बेचने के लिए चीन की एक लेखिका को 10 साल की सज़ा सुनाई गई है.
लिउ नाम की लेखिका को अन्हुई प्रांत की एक अदालत ने पिछले महीने 'अश्लील सामग्री' लिखने और उसे बेचने पर जेल भेजा.
'ऑक्युपेशन' नाम का उपन्यास 'पुरुषों के समलैंगिक संबंधों पर आधारित है, जिसमें उत्पीड़न समेत घटिया सेक्शुअल एक्ट्स के बारे में लिखा गया है.'
लेकिन उनकी सज़ा की अवधि लंबी होने से चीन के सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया जा रहा है .
बीजिंग न्यूज़ के अनुसार, इंटरनेट पर तियां यी कहलाने वाली लिउ ने कोर्ट में एक अपील दायर की है.
आपको ये भी रोचक लगेगा
भारत को लेकर किस रेस में हैं सऊदी अरब और ईरान
मोदी को अवतार मानने वाले 'विवादित' आहूजा की टीस
असली 'ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान' जिनसे डरते थे अंग्रेज़
क्या बिटक्वाइन का जादू ख़त्म हो रहा है?
चीन में पोर्नोग्राफ़ी ग़ैरक़ानूनी है.
'ये बहुत ज्यादा हो गया'
स्थानीय समाचार वेबसाइट, वुहू न्यूज़ के अनुसार, 31 अक्टूबर को लिउ को वुहू के पीपल्स कोर्ट ने 'अश्लील सामग्री' को फ़ायदे के लिए लिखने और बेचने के लिए सजा सुनाई गई.
हालांकि सुनवाई के ब्यौरे चीनी मीडिया में इसी हफ़्ते सामने आए.
लिउ का उपन्यास जब ऑनलाइन माध्यम पर लोकप्रिय होने लगा तो पुलिस अधिकारियों को इसकी ख़बर दी गई.
सरकारी न्यूज़ संस्था 'ग्लोबल टाइम्स' के मुताबिक, लिउ की किताब 'ऑक्युपेशन' और अन्य कामुक उपन्यासों की 7,000 से अधिक प्रतियां बिकी, जिस पर उन्हें डेढ़ लाख युआन यानी लगभग 15 लाख 46 हजार रुपये का फ़ायदा हुआ.
लेकिन कई सोशल मीडिया यूज़र्स का मानना है कि इसके लिए उन्हें जो सज़ा दी गई वो बहुत ज्यादा है.
जब एक किताब बनी सीआईए का ख़ुफिया मिशन
वो देशभक्ति और 'हिंदू बम' का भद्दा जश्न था: अरुंधति
सोशल मीडिया अकाउंट वीबो पर एक यूज़र ने कहा, ''एक उपन्यास के लिए 10 साल? ये बहुत ज्यादा हो गया.''
एक यूज़र ने 2013 की एक घटना का हवाला दिया, जिसमें एक पूर्व अधिकारी को चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने पर आठ साल की सजा सुनाई गई थी.
वीबो पर एक अन्य यूज़र ने लिखा, "जो बलात्कार के लिए दोषी पाए गए उन्हें 10 साल से कम की सजा मिलती है. इस लेखिका को 10 साल की सजा मिली. "
लिउ नाम की लेखिका को अन्हुई प्रांत की एक अदालत ने पिछले महीने 'अश्लील सामग्री' लिखने और उसे बेचने पर जेल भेजा.
'ऑक्युपेशन' नाम का उपन्यास 'पुरुषों के समलैंगिक संबंधों पर आधारित है, जिसमें उत्पीड़न समेत घटिया सेक्शुअल एक्ट्स के बारे में लिखा गया है.'
लेकिन उनकी सज़ा की अवधि लंबी होने से चीन के सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया जा रहा है .
बीजिंग न्यूज़ के अनुसार, इंटरनेट पर तियां यी कहलाने वाली लिउ ने कोर्ट में एक अपील दायर की है.
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'ये बहुत ज्यादा हो गया'
स्थानीय समाचार वेबसाइट, वुहू न्यूज़ के अनुसार, 31 अक्टूबर को लिउ को वुहू के पीपल्स कोर्ट ने 'अश्लील सामग्री' को फ़ायदे के लिए लिखने और बेचने के लिए सजा सुनाई गई.
हालांकि सुनवाई के ब्यौरे चीनी मीडिया में इसी हफ़्ते सामने आए.
लिउ का उपन्यास जब ऑनलाइन माध्यम पर लोकप्रिय होने लगा तो पुलिस अधिकारियों को इसकी ख़बर दी गई.
सरकारी न्यूज़ संस्था 'ग्लोबल टाइम्स' के मुताबिक, लिउ की किताब 'ऑक्युपेशन' और अन्य कामुक उपन्यासों की 7,000 से अधिक प्रतियां बिकी, जिस पर उन्हें डेढ़ लाख युआन यानी लगभग 15 लाख 46 हजार रुपये का फ़ायदा हुआ.
लेकिन कई सोशल मीडिया यूज़र्स का मानना है कि इसके लिए उन्हें जो सज़ा दी गई वो बहुत ज्यादा है.
जब एक किताब बनी सीआईए का ख़ुफिया मिशन
वो देशभक्ति और 'हिंदू बम' का भद्दा जश्न था: अरुंधति
सोशल मीडिया अकाउंट वीबो पर एक यूज़र ने कहा, ''एक उपन्यास के लिए 10 साल? ये बहुत ज्यादा हो गया.''
एक यूज़र ने 2013 की एक घटना का हवाला दिया, जिसमें एक पूर्व अधिकारी को चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने पर आठ साल की सजा सुनाई गई थी.
वीबो पर एक अन्य यूज़र ने लिखा, "जो बलात्कार के लिए दोषी पाए गए उन्हें 10 साल से कम की सजा मिलती है. इस लेखिका को 10 साल की सजा मिली. "
Friday, November 16, 2018
आंध्र सरकार की इजाजत के बगैर राज्य में किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर पाएगी सीबीआई
आंध्र प्रदेश सरकार ने उस समझौते से अपनी आम सहमति वापस ले ली है, जिसके तहत सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) को राज्य में कार्रवाई का अधिकार मिला हुआ था। राज्य की प्रधान सचिव एआर अनुराधा द्वारा 8 नवंबर को जारी किया गया एक गोपनीय सरकारी आदेश गुरुवार रात लीक होने के बाद इस फैसले का पता चला।
इसी साल अगस्त में दी थी आंध्र ने सहमति
आदेश में कहा गया कि दिल्ली पुलिस स्थापना कानून 1946 की धारा 6 के तहत दिल्ली पुलिस से जुड़े सदस्यों को आंध्र प्रदेश में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की जो आम सहमति दी गई थी, वो वापस ली जाती है।
देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी के नियमों के मुताबिक, दिल्ली सीबीआई के पूर्ण अधिकार क्षेत्र में आती है। लेकिन, दूसरे राज्यों में एजेंसी वहां की सरकारों की आम सहमति के आधार पर ही कार्रवाई कर सकती है।
आंध्र सरकार ने दिल्ली पुलिस स्थापना कानून के तहत इसी साल अगस्त में सीबीआई को राज्य में कार्रवाई करने के लिए आम सहमति दी थी।
एनडीए से अलग होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू आरोप लगा रहे थे कि केंद्र सरकार सीबीआई को अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
ममता ने किया फैसले का समर्थन
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू ने अपने राज्य में सीबीआई को कार्रवाई करने से रोकने का फैसला किया है और ये सही कदम है।
रिश्वतखोरी विवाद में सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की भूमिका की जांच से जुड़ी केंद्रीय सतर्कता अायोग (सीवीसी) की रिपोर्ट पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीवीसी से कहा कि वह सीलबंद लिफाफे में अपनी जांच रिपोर्ट वर्मा को सौंपे। शीर्ष अदालत ने कहा कि आलोक वर्मा के खिलाफ कुछ आरोपों पर सीवीसी ने प्रतिकूल बातें कही हैं। कुछ पहलुओं पर आगे जांच करने की जरूरत है। अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के रिश्वतखोरी विवाद में फंसने के बाद केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को ज्वाइंट डायरेक्टर नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त कर दिया था। जांच जारी रहने तक सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और नंबर दो अफसर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया था। छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी से जांच करने को कहा था।
इसी साल अगस्त में दी थी आंध्र ने सहमति
आदेश में कहा गया कि दिल्ली पुलिस स्थापना कानून 1946 की धारा 6 के तहत दिल्ली पुलिस से जुड़े सदस्यों को आंध्र प्रदेश में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की जो आम सहमति दी गई थी, वो वापस ली जाती है।
देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी के नियमों के मुताबिक, दिल्ली सीबीआई के पूर्ण अधिकार क्षेत्र में आती है। लेकिन, दूसरे राज्यों में एजेंसी वहां की सरकारों की आम सहमति के आधार पर ही कार्रवाई कर सकती है।
आंध्र सरकार ने दिल्ली पुलिस स्थापना कानून के तहत इसी साल अगस्त में सीबीआई को राज्य में कार्रवाई करने के लिए आम सहमति दी थी।
एनडीए से अलग होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू आरोप लगा रहे थे कि केंद्र सरकार सीबीआई को अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
ममता ने किया फैसले का समर्थन
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चंद्रबाबू ने अपने राज्य में सीबीआई को कार्रवाई करने से रोकने का फैसला किया है और ये सही कदम है।
रिश्वतखोरी विवाद में सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की भूमिका की जांच से जुड़ी केंद्रीय सतर्कता अायोग (सीवीसी) की रिपोर्ट पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सीवीसी से कहा कि वह सीलबंद लिफाफे में अपनी जांच रिपोर्ट वर्मा को सौंपे। शीर्ष अदालत ने कहा कि आलोक वर्मा के खिलाफ कुछ आरोपों पर सीवीसी ने प्रतिकूल बातें कही हैं। कुछ पहलुओं पर आगे जांच करने की जरूरत है। अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
सीबीआई के दो शीर्ष अफसरों के रिश्वतखोरी विवाद में फंसने के बाद केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को ज्वाइंट डायरेक्टर नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त कर दिया था। जांच जारी रहने तक सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और नंबर दो अफसर स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया था। छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी से जांच करने को कहा था।
Tuesday, November 6, 2018
10 साल की जेल काटने के बाद आरोप से बरी हुई विदेशी महिला
ऐनाबेले अनालिस्टा मलिबागो नाम की इस विदेशी महिला को ट्रायल कोर्ट से 10 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने 2014 में हाई कोर्ट में अपील की थी। अब हाई कोर्ट के फैसले से उन्हें जो राहत मिली है वह कोई मायने नहीं रखती, बस इतनी राहत है कि वह बरी हो गई हैं।
अभिनव गर्ग, नई दिल्ली
हेरोइन रखने की आरोपी एक महिला को 10 साल जेल काटने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने बरी कर दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले से न्याय व्यवस्था की सुस्त चाल पर फिर नजर जाती है। ऐनाबेले अनालिस्टा मलिबागो नाम की इस विदेशी महिला को ट्रायल कोर्ट से 10 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने 2014 में हाई कोर्ट में अपील की थी। अब हाई कोर्ट के फैसले से उन्हें जो राहत मिली है वह कोई मायने नहीं रखती, बस इतनी राहत है कि वह बरी हो गई हैं।
इतने साल बाद बरी किए जाने के फैसले से न्याय व्यवस्था की धीमी चाल पर चिंता जरूर होती है, जिसके कारण कई बार कई निर्दोषों और विचाराधीन कैदियों को सालों जेल में गुजारने पड़ जाते हैं। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कहा कि ऐनाबेले को 15 अक्टूबर 2008 को अरेस्ट किया गया था। ऐनाबेले को स्पाइसजेट के चेक-इन काउंटर पर डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू(DRI) ने हेरोइन के साथ अरेस्ट किया था। आरोप था कि उनके ट्रॉली बैग से 1.24 किलोग्राम हेरोइन मिली थी। टेस्ट के बाद पता चला था कि बरामद पाउडर हेरोइन था, जो 35.6 फीसदी शुद्ध था। अरेस्ट के बाद ऐनाबेले का लंबा ट्रायल चला और साल 2014 में उन्हें दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई। ट्रायल चलने तक महिला पहले ही 5 साल 5 महीने की सजा काट चुकी थीं।
इसके बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की गई औ र उसका फैसला आने में 4 साल से ज्यादा का वक्त लग गया। महिला के वकील ने हाई कोर्ट में कहा कि पूरा केस इसी बात से विकृत हो जाता है कि शिकायतकर्ता केस की आईओ यानी जांच अधिकारी थीं। आईओ ने ही लिखित शिकायत दाखिल की थी, जिसके आधार पर ऐनाबेले के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई।
जस्टिस सी हरि शंकर ने इसी आधार पर दोषी करार दिए जाने के फैसले को पलट दिया और ऐनाबेले को बरी कर दिया। जस्टिस हरि शंकर ने कहा कि जांच हमेशा निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई कि केस रजिस्टर करने वाला और आरोप लगाने वाली पुलिस अधिकारी खुद केस का जांच अधिकारी नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता है तो केस की जांच निष्पक्षता पर गंभर सवाल उठने स्वाभाविक हो जाते हैं।
अभिनव गर्ग, नई दिल्ली
हेरोइन रखने की आरोपी एक महिला को 10 साल जेल काटने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने बरी कर दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले से न्याय व्यवस्था की सुस्त चाल पर फिर नजर जाती है। ऐनाबेले अनालिस्टा मलिबागो नाम की इस विदेशी महिला को ट्रायल कोर्ट से 10 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने 2014 में हाई कोर्ट में अपील की थी। अब हाई कोर्ट के फैसले से उन्हें जो राहत मिली है वह कोई मायने नहीं रखती, बस इतनी राहत है कि वह बरी हो गई हैं।
इतने साल बाद बरी किए जाने के फैसले से न्याय व्यवस्था की धीमी चाल पर चिंता जरूर होती है, जिसके कारण कई बार कई निर्दोषों और विचाराधीन कैदियों को सालों जेल में गुजारने पड़ जाते हैं। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने कहा कि ऐनाबेले को 15 अक्टूबर 2008 को अरेस्ट किया गया था। ऐनाबेले को स्पाइसजेट के चेक-इन काउंटर पर डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू(DRI) ने हेरोइन के साथ अरेस्ट किया था। आरोप था कि उनके ट्रॉली बैग से 1.24 किलोग्राम हेरोइन मिली थी। टेस्ट के बाद पता चला था कि बरामद पाउडर हेरोइन था, जो 35.6 फीसदी शुद्ध था। अरेस्ट के बाद ऐनाबेले का लंबा ट्रायल चला और साल 2014 में उन्हें दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई। ट्रायल चलने तक महिला पहले ही 5 साल 5 महीने की सजा काट चुकी थीं।
इसके बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की गई औ र उसका फैसला आने में 4 साल से ज्यादा का वक्त लग गया। महिला के वकील ने हाई कोर्ट में कहा कि पूरा केस इसी बात से विकृत हो जाता है कि शिकायतकर्ता केस की आईओ यानी जांच अधिकारी थीं। आईओ ने ही लिखित शिकायत दाखिल की थी, जिसके आधार पर ऐनाबेले के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई।
जस्टिस सी हरि शंकर ने इसी आधार पर दोषी करार दिए जाने के फैसले को पलट दिया और ऐनाबेले को बरी कर दिया। जस्टिस हरि शंकर ने कहा कि जांच हमेशा निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई कि केस रजिस्टर करने वाला और आरोप लगाने वाली पुलिस अधिकारी खुद केस का जांच अधिकारी नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता है तो केस की जांच निष्पक्षता पर गंभर सवाल उठने स्वाभाविक हो जाते हैं।
Sunday, November 4, 2018
ईरान पर अमरीकी प्रतिबंधों का असर क्या होगा?: रियलिटी चेक
आज यानी पांच नवंबर से ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध (अमरीकी समयानुसार चार नवंबर की मध्यरात्रि से) लागू हो गया है. अमरीकी प्रतिबंधों पर ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
रूहानी ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि ईरान के ख़िलाफ़ इस नई साज़िश में अमरीका सफल नहीं हो सकेगा.''
ईरान की अर्थव्यवस्था तेल के निर्यात पर निर्भर है और इस प्रतिबंध के बाद ईरान तेल नहीं बेच पाएगा.
हालांकि यूरोपियन यूनियन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों को अपना समर्थन देने की बात कही है.
लेकिन क्या ये कंपनियां इन प्रतिबंधों से प्रभावित होंगी क्योंकि यदि उन्होंने ईरान के साथ व्यापार जारी रखा तो अमरीका के साथ उनके व्यापार पर सीधा असर पड़ सकता है.
अमरीका इस साल की शुरुआत में ईरान समेत छह देशों के साथ 2015 में हुई परमाणु संधि से बाहर निकल गया था.
2015 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ जो परमाणु संधि की थी उसके तहत 2016 में अमरीका और अन्य पांच देशों से ईरान को तेल बेचने और उसके केंद्रीय बैंक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार की अनुमति मिली थी.
इस परमाणु संधि से बाहर आने की घोषणा के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक संबोधन में कहा था कि दुनिया के सभी देश ईरान से संबंध तोड़ दें.
लेकिन यूरोपीय देशों समेत अन्य देशों का मानना है कि ईरान परमाणु सौदे पर टिका हुआ है जबकि यूरोप के देशों का मानना है कि अमरीका ने परमाणु समझौते पर एकतरफ़ा रुख़ दिखाते हुए इसे तोड़ दिया.
विश्व व्यापार में अमरीका का ऐसा प्रभुत्व है कि इस घोषणा मात्र से अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने ईरान के साथ अपने व्यापार से हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं और इसकी वजह से ईरान के तेल निर्यात में गिरावट आई है.
अमरीकी प्रतिबंध कितना प्रभावी
अमरीका की इस घोषणा के तहत जो कंपनियां ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगी उन्हें अमरीका में व्यापार करने की अनुमति नहीं होगी.
इसके अलावा, उन अमरीकी कंपनियों को भी दंड भोगना पड़ेगा जो ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों के साथ बिज़नेस करती हैं.
सोमवार को बैंकिंग क्षेत्र पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे. अगस्त में सोने, बहुमूल्य धातु और मोटर वाहन क्षेत्र (ऑटोमोटिव सेक्टर) समेत कई उद्योगों को इस प्रतिबंध के घेरे में लिया गया था.
अमरीका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वो ईरान के तेल व्यापार को पूरी तरह से ख़त्म करना चाहता है, लेकिन साथ ही उसने आठ देशों को अस्थायी रूप से ईरान से तेल आयात करने के लिए कुछ समय की इजाज़त दे दी है.
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमरीकी सहयोगी इटली, भारत, जापान और दक्षिण अफ्रीका इन आठ देशों में शामिल हैं.
यूरोपीय संघ अपनी कंपनियों के लिए ईरान के साथ व्यापार करते रहने और कड़े अमरीकी हर्जाने के भुगतान से बचने के लिए एक पेमेंट व्यवस्था लागू करने की योजना बना रहा है. इसका नाम है स्पेशल पर्पस वीईकल (एसपीवी). इस व्यवस्था में कंपनियों को अमरीकी वित्तीय प्रणाली से नहीं गुजरना पड़ेगा.
बैंक की तरह, एसपीवी, ईरान और इसके साथ व्यापार करने वाली कंपनियों के बीच लेनदेन को संभालेगा.
जब ईरान यूरोपीय यूनियन के देशों में तेल निर्यात करेगा तो तेल आयात करने वाली कंपनियां उसे एसपीवी में भुगतान करेंगी.
ईरान एसपीवी को क्रेडिट के तौर पर रखेगा और यूरोपियन यूनियन के अन्य देशों से सामान ख़रीदने के लिए इसी एसपीवी के ज़रिए उन्हें भुगतान करेगा.
यूरोपिय यूनियन ने इसे लेकर अपने क़ानून में भी बदलाव किए हैं, जो यूरोपीय यूनियन की कंपनियों को इस प्रतिबंध के मद्देनज़र अमरीका से क्षतिपूर्ति मांगने की अनुमति देता है.
हालांकि यूरोपीय यूनियन ने इस प्रतिबंध से निपटने की अपनी योजना तैयार कर ली है, बावजूद इसके कई कंपनियों पर इन प्रतिबंधों का व्यापक असर पड़ेगा.
उदाहरण के लिए, शिपिंग ऑपरेटर्स एसपीवी व्यवस्था के माध्यम से तेल ख़रीदना चाहेंगे लेकिन उसकी ढुलाई करने वाली कंपनियां जो अमरीका में अपना बिजनेस चला रही हैं, उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया तो उन्हें बहुत घाटा हो सकता है.
ईरान पर प्रतिबंधों में ढील के पक्ष में नहीं अमरीका
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ शोधकर्ता और प्रतिबंध मामलों के जानकार रिचर्ड नेफ्यू कहते हैं, "ईरानी अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर अमरीकी वित्त प्रणाली पर निर्भर नहीं है."
"लेकिन मुद्दा यह है कि ईरान के साथ बड़े स्तर पर व्यापार करने वाले कई देश यह ख़तरा मोल भी लेना चाहते हैं."
वो कहते हैं कि बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी और मझोली कंपनियां के इस एसपीवी व्यवस्था के ज़्यादा इस्तेमाल करने के आसार हैं.
रीड स्मिथ में अतंरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख ली हैंनसन कहते हैं, "एक और समस्या यह है कि जिन उत्पादों को एसपीवी के जरिए ईरान को बेचा जाएगा उन पर भी दूसरे स्तर का प्रतिबंध लगाया जा सकता है."
रूहानी ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि ईरान के ख़िलाफ़ इस नई साज़िश में अमरीका सफल नहीं हो सकेगा.''
ईरान की अर्थव्यवस्था तेल के निर्यात पर निर्भर है और इस प्रतिबंध के बाद ईरान तेल नहीं बेच पाएगा.
हालांकि यूरोपियन यूनियन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों को अपना समर्थन देने की बात कही है.
लेकिन क्या ये कंपनियां इन प्रतिबंधों से प्रभावित होंगी क्योंकि यदि उन्होंने ईरान के साथ व्यापार जारी रखा तो अमरीका के साथ उनके व्यापार पर सीधा असर पड़ सकता है.
अमरीका इस साल की शुरुआत में ईरान समेत छह देशों के साथ 2015 में हुई परमाणु संधि से बाहर निकल गया था.
2015 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ जो परमाणु संधि की थी उसके तहत 2016 में अमरीका और अन्य पांच देशों से ईरान को तेल बेचने और उसके केंद्रीय बैंक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार की अनुमति मिली थी.
इस परमाणु संधि से बाहर आने की घोषणा के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक संबोधन में कहा था कि दुनिया के सभी देश ईरान से संबंध तोड़ दें.
लेकिन यूरोपीय देशों समेत अन्य देशों का मानना है कि ईरान परमाणु सौदे पर टिका हुआ है जबकि यूरोप के देशों का मानना है कि अमरीका ने परमाणु समझौते पर एकतरफ़ा रुख़ दिखाते हुए इसे तोड़ दिया.
विश्व व्यापार में अमरीका का ऐसा प्रभुत्व है कि इस घोषणा मात्र से अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने ईरान के साथ अपने व्यापार से हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं और इसकी वजह से ईरान के तेल निर्यात में गिरावट आई है.
अमरीकी प्रतिबंध कितना प्रभावी
अमरीका की इस घोषणा के तहत जो कंपनियां ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगी उन्हें अमरीका में व्यापार करने की अनुमति नहीं होगी.
इसके अलावा, उन अमरीकी कंपनियों को भी दंड भोगना पड़ेगा जो ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों के साथ बिज़नेस करती हैं.
सोमवार को बैंकिंग क्षेत्र पर भी प्रतिबंध लगाए जाएंगे. अगस्त में सोने, बहुमूल्य धातु और मोटर वाहन क्षेत्र (ऑटोमोटिव सेक्टर) समेत कई उद्योगों को इस प्रतिबंध के घेरे में लिया गया था.
अमरीका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वो ईरान के तेल व्यापार को पूरी तरह से ख़त्म करना चाहता है, लेकिन साथ ही उसने आठ देशों को अस्थायी रूप से ईरान से तेल आयात करने के लिए कुछ समय की इजाज़त दे दी है.
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमरीकी सहयोगी इटली, भारत, जापान और दक्षिण अफ्रीका इन आठ देशों में शामिल हैं.
यूरोपीय संघ अपनी कंपनियों के लिए ईरान के साथ व्यापार करते रहने और कड़े अमरीकी हर्जाने के भुगतान से बचने के लिए एक पेमेंट व्यवस्था लागू करने की योजना बना रहा है. इसका नाम है स्पेशल पर्पस वीईकल (एसपीवी). इस व्यवस्था में कंपनियों को अमरीकी वित्तीय प्रणाली से नहीं गुजरना पड़ेगा.
बैंक की तरह, एसपीवी, ईरान और इसके साथ व्यापार करने वाली कंपनियों के बीच लेनदेन को संभालेगा.
जब ईरान यूरोपीय यूनियन के देशों में तेल निर्यात करेगा तो तेल आयात करने वाली कंपनियां उसे एसपीवी में भुगतान करेंगी.
ईरान एसपीवी को क्रेडिट के तौर पर रखेगा और यूरोपियन यूनियन के अन्य देशों से सामान ख़रीदने के लिए इसी एसपीवी के ज़रिए उन्हें भुगतान करेगा.
यूरोपिय यूनियन ने इसे लेकर अपने क़ानून में भी बदलाव किए हैं, जो यूरोपीय यूनियन की कंपनियों को इस प्रतिबंध के मद्देनज़र अमरीका से क्षतिपूर्ति मांगने की अनुमति देता है.
हालांकि यूरोपीय यूनियन ने इस प्रतिबंध से निपटने की अपनी योजना तैयार कर ली है, बावजूद इसके कई कंपनियों पर इन प्रतिबंधों का व्यापक असर पड़ेगा.
उदाहरण के लिए, शिपिंग ऑपरेटर्स एसपीवी व्यवस्था के माध्यम से तेल ख़रीदना चाहेंगे लेकिन उसकी ढुलाई करने वाली कंपनियां जो अमरीका में अपना बिजनेस चला रही हैं, उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया तो उन्हें बहुत घाटा हो सकता है.
ईरान पर प्रतिबंधों में ढील के पक्ष में नहीं अमरीका
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में वरिष्ठ शोधकर्ता और प्रतिबंध मामलों के जानकार रिचर्ड नेफ्यू कहते हैं, "ईरानी अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर अमरीकी वित्त प्रणाली पर निर्भर नहीं है."
"लेकिन मुद्दा यह है कि ईरान के साथ बड़े स्तर पर व्यापार करने वाले कई देश यह ख़तरा मोल भी लेना चाहते हैं."
वो कहते हैं कि बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी और मझोली कंपनियां के इस एसपीवी व्यवस्था के ज़्यादा इस्तेमाल करने के आसार हैं.
रीड स्मिथ में अतंरराष्ट्रीय व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख ली हैंनसन कहते हैं, "एक और समस्या यह है कि जिन उत्पादों को एसपीवी के जरिए ईरान को बेचा जाएगा उन पर भी दूसरे स्तर का प्रतिबंध लगाया जा सकता है."
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