美国总统特朗普与朝鲜最高领导人金正恩将于2月27日至28日在越南河内举行第二次会谈。在去年六月新加坡会谈带来的多数关注转变为怀疑与批评后,二人此次将面临更高的要求。
在新加坡峰会上,特朗普与金正恩的友好互动给很多人带来了不小震撼。但随后数月间,美国和朝鲜两国间的关系不时反复,关键问题无核化也缺乏进展。这种背景下到来的第二次特金会,美朝需要以更加具体的成果回应外界质疑。
在多番交锋与会谈中,两国对彼此的要求早已清晰。美国希望朝鲜放弃核武器,朝鲜期待美国帮助放松国际制裁。在河内,全世界的目光将关注两国为彼此作出怎样的让步。
与此同时,金正恩乘坐火车穿越中国抵达越南,这样的选择也在提醒国际社会关注中国在美朝关系中扮演的角色。
第二次特金会选址河内的多方考量
观点:是否应乐观看待第二次“特金会”
朝鲜不急于取悦美国的原因
特朗普会再一次宣告外交胜利吗?
第一次特金会及朝鲜暂停核试验一直是特朗普引以为豪的外交成就。在创造了美国历史上最长时间政府停摆记录后,越南会谈给特朗普提供了一个突破内政困境的机会。
“目前事实上没有任何成果,只要能在这个基础上产生一些有实际意义的结果,特朗普就可以宣称是外交胜利,”香港岭南大学亚太研究中心主任张泊汇称。
但面对这两位极具个性又颇难预测的领导人,大多朝鲜问题专家对此次峰会并不乐观。
“如果关心细节的话,第二次峰会肯定会让人失望,”韩国世宗研究所中国研究中心主任李成贤向BBC中文表示。
“特朗普和金正恩是政治家,他们会拍照、握手、微笑,但过去几个月间两国没有沟通。” 李成贤认为,虽然两国近来重新开始互动,但对于无核化和制裁等重要问题,两人见面前的谈判时间“绝对不够,所以我们不要期望太高”。
新加坡峰会上,金正恩向特朗普承诺,将“向朝鲜半岛完全无核化方向努力”。而在这之后,朝鲜多次被质疑继续推进武器项目。
过去一年间,朝鲜已经宣布废除丰溪里核试验场,且没有进行任何核试验及导弹试验。
虽然朝鲜态度看似有了很大转变,但美朝未向外界透露是否有具体去核时间表和路线图,这不仅给朝鲜去核的诚意画上了一个巨大的问号,也为之后的诸多反复埋下了伏笔。
横亘在美朝之间的是看似缩小但仍然严重的互不信任。在过去70年间,两国的双边不信任积累已久,要想让朝鲜放弃对他们最重要的战略武器,绝不是两次峰会可以解决的。也正是这个原因,李成贤断定朝核问题今后仍有“很大问题”。
“很多西方媒体都误读了朝鲜的宣言,朝鲜并不说要单方面放弃(核武器),而是有条件放弃,”他说。“这是要看美国可以给他什么东西,让他一步一步,朝着完全无核化方向努力。”
而特朗普与金正恩都明白,这场会谈需要更加详细的成果清单。张泊汇告诉BBC中文,金正恩知道需要为特朗普作出一些具体让步。“目前美国对朝鲜的策略对朝鲜是有利的,他也知道特朗普需要一些具体回报来维持现状。”
至于具体会有哪些进展,他则表示目前情况下可以期待的最理想状况便是“销毁战略导弹,停止现有浓缩核材料的活动”,但即便这样,“事实上仍没有涉及到朝鲜拥有核武器的事实,离无核化还很远。”
金正恩曾在2019年新年演说中明确表示,如果美国继续提出单方面要求,不放松对朝制裁,朝鲜可能“不得不探索新的方向”。要想换取金正恩在去核问题上的具体进展,特朗普也需给予相应让步。
去年在新加坡峰会上,特朗普出人意料地宣布暂停韩美联合军演,让其盟友及众多观察人士措手不及。这次峰会的回报应在此基础上有所升级。
与许多专家一样,李成贤与张泊汇认为,美朝两国在河内达成《停战宣言》的可能性较大。美国宣布朝鲜战争结束极大利于朝鲜成为正常国家。但美国智库战略与国际事务中心(CSIS)朝鲜问题高级研究员特里(Sue Mi Terry)警告称,从长远角度看,这会损害美国在盟友韩国驻军的合理性。
在越南会谈前,特朗普也提到了朝鲜一直要求的放松制裁问题。2月20日他在白宫表示,他愿意“能够取消制裁”,不过在此之前朝鲜需要作出“有意义的”行动。
而美国国务卿蓬佩奥则在2月22日表示,除非拥有核武器的朝鲜所构成的危险出现“实质性减少”,否则美国不打算放松对朝制裁。
Monday, February 25, 2019
Tuesday, February 19, 2019
माले में युवराज ने दोस्ताना मैच में हिस्सा लिया, रिवर्स स्विप से छक्का लगाया
खेल डेस्क. भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे युवराज सिंह एयर इंडिया के लिए दोस्ताना मैच खेलने माले गए थे।। उन्होंने वहां के एकुवेनी स्पोर्ट्स ग्राउंड पर मालदीव क्रिकेट टीम के खिलाफ एक ऐसा छक्का लगाया जिसे प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर खूब शेयर किए। दरअसल, मालदीव खेल मंत्रालय और भारतीय दूतावास के द्वारा भारत-मालदीव फ्रेंडशिप सीरीज का आयोजन किया गया। इस मैच में युवराज ने रिवर्स स्विप से छक्का लगाया।
मालदीव की टीम में वहां के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और उप-राष्ट्रपति फैसल नसीम भी थे। युवराज ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि क्रिकेट को दोनों देशों की दोस्ती को मजबूत करने के लिए चुना गया।"
2011 वर्ल्ड कप में युवराज मैन ऑफ द सीरीज थे
2011 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे युवराज फिलहाल टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं। युवराज उस वर्ल्ड कप मैन ऑफ द सीरीज चुने गए थे। उन्होंने अपना पिछला वनडे 30 जून 2017 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था। वहीं, पिछला टी-20 इंग्लैंड के खिलाफ 1 फरवरी 2017 को खेला था।
युवराज आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेलेंगे
युवराज को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की टीम मुंबई इंडियंस ने इस सीजन के लिए 1 करोड़ रुपए में खरीदा है। वे नीलामी के दौरान पर पहले दौर में नहीं बिके थे, लेकिन दूसरे राउंड में मुंबई ने उन्हें खरीद लिया था। वे पिछली बार किंग्स इलेवन पंजाब के लिए खेले थे। उनका प्रदर्शन खास नहीं रहा था और वे 8 मैच में 65 रन ही बना सके थे।
वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 नवम्बर को अपने संसदीय क्षेत्र को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। इस दिन वह वाराणसी से हलदिया के बीच जलमार्ग शुरू करने के लिए बनारस में बने मल्टी मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर केंद्रीय सड़क एवं जहाज रानी मंत्री नीतिन गडकरी, राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे। हरहुआ तिराहे पर एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
बनारस में बने मल्टी मॉडल टर्मिनल को जलमार्ग विकास प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है। इसके शुरू होने के बाद वाराणसी-हलदिया के बीच भारी मालवाहक पोतों के आवागमन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इसको पूरी तरह से पर्यावरण फ्रेंडली बनाया गया है। इसकी लागत 5369.18 करोड़ रुपए है। इसका 50 फीसदी हिस्सा भारत सरकार ने दिया है, जबकि बाकी का 50 फीसदी विश्व बैंक ने दिया है। इसका निमार्ण 33 हेक्टेयर क्षेत्र में किया गया है। वाराणसी से हलदिया के बीच इस तरह के तीन टर्मिनल होंगे। दूसरा साहेबगंज और तीसरा हलदिया में होगा।
इसके अतिरिक्त पीएम मोदी वाराणसी से पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के लिए निकलने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्गों को भी देश को समर्पित करेंगे। इनकी लम्बाई 34 किलोमीटर होगी जबिक इसे बनाने में 1571.95 करोड़ रुपए की लागत आई है।
मालदीव की टीम में वहां के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और उप-राष्ट्रपति फैसल नसीम भी थे। युवराज ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि क्रिकेट को दोनों देशों की दोस्ती को मजबूत करने के लिए चुना गया।"
2011 वर्ल्ड कप में युवराज मैन ऑफ द सीरीज थे
2011 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे युवराज फिलहाल टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं। युवराज उस वर्ल्ड कप मैन ऑफ द सीरीज चुने गए थे। उन्होंने अपना पिछला वनडे 30 जून 2017 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था। वहीं, पिछला टी-20 इंग्लैंड के खिलाफ 1 फरवरी 2017 को खेला था।
युवराज आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेलेंगे
युवराज को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की टीम मुंबई इंडियंस ने इस सीजन के लिए 1 करोड़ रुपए में खरीदा है। वे नीलामी के दौरान पर पहले दौर में नहीं बिके थे, लेकिन दूसरे राउंड में मुंबई ने उन्हें खरीद लिया था। वे पिछली बार किंग्स इलेवन पंजाब के लिए खेले थे। उनका प्रदर्शन खास नहीं रहा था और वे 8 मैच में 65 रन ही बना सके थे।
वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 नवम्बर को अपने संसदीय क्षेत्र को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। इस दिन वह वाराणसी से हलदिया के बीच जलमार्ग शुरू करने के लिए बनारस में बने मल्टी मॉडल टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर केंद्रीय सड़क एवं जहाज रानी मंत्री नीतिन गडकरी, राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे। हरहुआ तिराहे पर एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
बनारस में बने मल्टी मॉडल टर्मिनल को जलमार्ग विकास प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है। इसके शुरू होने के बाद वाराणसी-हलदिया के बीच भारी मालवाहक पोतों के आवागमन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इसको पूरी तरह से पर्यावरण फ्रेंडली बनाया गया है। इसकी लागत 5369.18 करोड़ रुपए है। इसका 50 फीसदी हिस्सा भारत सरकार ने दिया है, जबकि बाकी का 50 फीसदी विश्व बैंक ने दिया है। इसका निमार्ण 33 हेक्टेयर क्षेत्र में किया गया है। वाराणसी से हलदिया के बीच इस तरह के तीन टर्मिनल होंगे। दूसरा साहेबगंज और तीसरा हलदिया में होगा।
इसके अतिरिक्त पीएम मोदी वाराणसी से पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के लिए निकलने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्गों को भी देश को समर्पित करेंगे। इनकी लम्बाई 34 किलोमीटर होगी जबिक इसे बनाने में 1571.95 करोड़ रुपए की लागत आई है।
Wednesday, February 13, 2019
'दूसरी जाति में शादी करनेवाले को आतंकवादी कहते हैं'
अपनी ज़िंदगी में ख़ुश नई पीढ़ी के कई लड़के-लड़कों की ही तरह शिल्पा भी जाति के आधार पर भेदभाव को देख कर अनदेखा कर देती थी.
शिल्पा गुजरात के सौराष्ट्र के एक गांव में रहने वाले राजपूत परिवार से हैं.
जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मं फ़ेसबुक के ज़रिए शिल्पा की मुलाकात रविंद्र से हुई और फिर प्यार हुआ तो रविंद्र के दलित होने का मतलब शिल्पा ठीक से समझ नहीं पाई.
शिल्पा बताती हैं, "सब परिवारों में लड़कियों पर ज़्यादा बंदिशें होती हैं, मुझपर भी थी. कॉलेज के अलावा घर से बाहर नहीं निकलती थी. ना समझ थी, ना सपने, बस प्यार हो गया था."
पर जल्द ही शिल्पा को समझ आ गया कि वो जो कुछ करना चाहती है वो नामुमकिन के समान है.
रविंद्र कहते हैं, "शिल्पा को समझाना पड़ा कि हक़ीक़त क्या है. चुनाव का व़क्त था और एक दलित व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी. हमें उनकी गली में जाना तक मना था, और मैं तो उनके घर में शादी करना चाहता था."
शिल्पा घुटन महसूस करने लगी थी. मानो उनके लिए ये आर-पार की लड़ाई थी. उन्हें लगने लगा कि रविंद्र से शादी नहीं हुई तो ज़िंदगी के कोई मायने नहीं रहेंगे.
रविंद्र के मुताबिक़ अंतरजातीय शादी करनेवालों को दूसरी दुनिया का प्राणी माना जाता है.
वो कहते हैं, "दूसरी जाति में शादी करनेवालों को आंतकवादी समझा जाता है. माना जाता है कि वो समाज में बग़ावत कर रहे हैं. ये 21वीं सदी है पर कोई बदलाव नहीं चाहता. बल्कि सोशल मीडिया के ज़रिए डर और फैलाया जा रहा है."
लेकिन इस माहौल से रविंद्र नहीं डरे और उन्होंने निराशा में डूबती शिल्पा को भी बचाया.
एक दिन शिल्पा ने उन्हें फ़ोन किया, जिसके बाद रविंद्र बाइक उठाकर चल दिए. रविंद्र ने कहा कि "आत्महत्या हमारा रास्ता नहीं, अब दुनिया को साथ रहकर दिखाएंगे."
इज़्ज़त के नाम पर हत्या के मुद्दे से निपटने के लिए भारत में कोई क़ानून नहीं है.
देश में हो रहे अपराधों की जानकारी जुटानेवाली संस्था 'नैश्नल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो' हत्या के आंकड़ों को मक़सद के आधार पर श्रेणीबद्ध करता है.
2016 में इज़्ज़त के नाम पर हत्या यानी 'ऑनर किलिंग' के 71 मामले, 2015 में 251 और 2014 में 28 मामले दर्ज हुए थे.
'ऑनर किलिंग' के मामले अक़्सर दर्ज नहीं किए जाते जिस वजह से आंकड़ों के बिना पर सही-सही आकलन करना मुश्किल है.
शिल्पा और रविंद्र ने घर से भागकर शादी कर ली. लेकिन उनकी लड़ाई का ये अंत नहीं, बल्कि शुरुआत भर थी. घर छूट गया और इंजीनियर की नौकरी भी. रविंद्र दिहाड़ी मज़दूरी करने के लिए मजबूर हो गए.
किराए पर कमरा लेते तो उनकी अलग-अलग जाति का पता लगते ही कमरा खाली करने को कह दिया जाता.
दोनों ने क़रीब पंद्रह बार घर बदले. हर व़क्त उन्हें हमले का डर बना रहता. सड़क पर निकलते व़क्त, काम करते व़क्त, अनजानी परछाईयों का डर उन्हें हमेशा डराए रखता.
कभी-कभी गुस्सा, झुंझलाहट और कई बार एक-दूसरे पर आरोप लगाने की नौबत भी आती. घर-परिवार से दूरी और मन में उन्हें दुखी करने का बोझ उन्हें डिप्रेशन की ओर ले जाने लगा.
शिल्पा बताती हैं, "फिर एक दिन हम दोनों ने बैठकर लंबी बातचीत की और तय किया कि एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि एक दूसरे के साथ मिलकर अपनी परेशानियों का सामना करेंगे."
साथ होने की अपनी अलग ताकत है जो ख़ुशी देती है. शिल्पा कहती है कि "अब रोना बंद कर दिया है, रोने से निगेटिव भावनाएं आती हैं. इसलिए ज़िंदगी हंसकर जीने की ठानी है."
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2018 में दो वयस्कों के बीच मर्ज़ी से होनेवाली शादी में खाप पंचायतों के दख़ल को ग़ैर-क़ानूनी क़रार दे दिया.
कोर्ट का कहना था कि परिवार, समुदाय और समाज की मर्ज़ी से ज़्यादा ज़रूरी है, शादी के लिए लड़का और लड़की की रज़ामंदी.
खाप पंचायतों और परिवारों से सुरक्षा के लिए कोर्ट ने राज्य सरकारों को 'सेफ़ हाउस' बनाने की सलाह भी दी.
क़रीब छह महीने बाद गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर कोर्ट के दिशा-निर्दश लागू करने को कहा भी, लेकिन कुछ ही राज्यों ने अब तक 'सेफ़ हाउस' बनाए हैं.
शिल्पा और रविंद्र अब अपनी ज़िंदगी और फ़ैसलों के बारे में ख़ुलकर बात करते हैं. अंतरजातीय शादी करने की चाहत रखनेवाले कई और जोड़े अब उनसे सलाह लेते हैं.
पर ये जोड़े सामने नहीं आना चाहते. शायद उन्हें भी साथ होने की जद्दोजहद और ख़ौफ़ से निकलकर ताकत और ख़ुशी के अहसास तक का सफ़र फिलहाल ख़ुद ही तय करना है.
रविंद्र के मुताबिक़ अलग-अलग जाति के लोगों के बीच में शादी होना, उस बदलाव की ओर पहला कदम है जिससे देश में जाति के आधार पर भेदभाव ख़त्म हो जाएगा.
अब वो वक़ालत की पढ़ाई कर रहे हैं ताक़ि उन लोगों की मदद कर सकें जो पढ़े-लिखे नहीं हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद नहीं कर पाते.
शिल्पा कहती हैं कि वो पहले वाली उस सिमटी-सकुचाई लड़की से बहुत आगे निकल आई हैं. वो कहती हैं, "अब मेरी ज़िंदगी के कुछ मायने हैं, शायद पापा भी ये देख पाएं कि मैंने सिर्फ़ मस्ती करने के लिए शादी नहीं की और वो मुझे ऐक्सेप्ट कर लें."
शिल्पा गुजरात के सौराष्ट्र के एक गांव में रहने वाले राजपूत परिवार से हैं.
जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मं फ़ेसबुक के ज़रिए शिल्पा की मुलाकात रविंद्र से हुई और फिर प्यार हुआ तो रविंद्र के दलित होने का मतलब शिल्पा ठीक से समझ नहीं पाई.
शिल्पा बताती हैं, "सब परिवारों में लड़कियों पर ज़्यादा बंदिशें होती हैं, मुझपर भी थी. कॉलेज के अलावा घर से बाहर नहीं निकलती थी. ना समझ थी, ना सपने, बस प्यार हो गया था."
पर जल्द ही शिल्पा को समझ आ गया कि वो जो कुछ करना चाहती है वो नामुमकिन के समान है.
रविंद्र कहते हैं, "शिल्पा को समझाना पड़ा कि हक़ीक़त क्या है. चुनाव का व़क्त था और एक दलित व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी. हमें उनकी गली में जाना तक मना था, और मैं तो उनके घर में शादी करना चाहता था."
शिल्पा घुटन महसूस करने लगी थी. मानो उनके लिए ये आर-पार की लड़ाई थी. उन्हें लगने लगा कि रविंद्र से शादी नहीं हुई तो ज़िंदगी के कोई मायने नहीं रहेंगे.
रविंद्र के मुताबिक़ अंतरजातीय शादी करनेवालों को दूसरी दुनिया का प्राणी माना जाता है.
वो कहते हैं, "दूसरी जाति में शादी करनेवालों को आंतकवादी समझा जाता है. माना जाता है कि वो समाज में बग़ावत कर रहे हैं. ये 21वीं सदी है पर कोई बदलाव नहीं चाहता. बल्कि सोशल मीडिया के ज़रिए डर और फैलाया जा रहा है."
लेकिन इस माहौल से रविंद्र नहीं डरे और उन्होंने निराशा में डूबती शिल्पा को भी बचाया.
एक दिन शिल्पा ने उन्हें फ़ोन किया, जिसके बाद रविंद्र बाइक उठाकर चल दिए. रविंद्र ने कहा कि "आत्महत्या हमारा रास्ता नहीं, अब दुनिया को साथ रहकर दिखाएंगे."
इज़्ज़त के नाम पर हत्या के मुद्दे से निपटने के लिए भारत में कोई क़ानून नहीं है.
देश में हो रहे अपराधों की जानकारी जुटानेवाली संस्था 'नैश्नल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो' हत्या के आंकड़ों को मक़सद के आधार पर श्रेणीबद्ध करता है.
2016 में इज़्ज़त के नाम पर हत्या यानी 'ऑनर किलिंग' के 71 मामले, 2015 में 251 और 2014 में 28 मामले दर्ज हुए थे.
'ऑनर किलिंग' के मामले अक़्सर दर्ज नहीं किए जाते जिस वजह से आंकड़ों के बिना पर सही-सही आकलन करना मुश्किल है.
शिल्पा और रविंद्र ने घर से भागकर शादी कर ली. लेकिन उनकी लड़ाई का ये अंत नहीं, बल्कि शुरुआत भर थी. घर छूट गया और इंजीनियर की नौकरी भी. रविंद्र दिहाड़ी मज़दूरी करने के लिए मजबूर हो गए.
किराए पर कमरा लेते तो उनकी अलग-अलग जाति का पता लगते ही कमरा खाली करने को कह दिया जाता.
दोनों ने क़रीब पंद्रह बार घर बदले. हर व़क्त उन्हें हमले का डर बना रहता. सड़क पर निकलते व़क्त, काम करते व़क्त, अनजानी परछाईयों का डर उन्हें हमेशा डराए रखता.
कभी-कभी गुस्सा, झुंझलाहट और कई बार एक-दूसरे पर आरोप लगाने की नौबत भी आती. घर-परिवार से दूरी और मन में उन्हें दुखी करने का बोझ उन्हें डिप्रेशन की ओर ले जाने लगा.
शिल्पा बताती हैं, "फिर एक दिन हम दोनों ने बैठकर लंबी बातचीत की और तय किया कि एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि एक दूसरे के साथ मिलकर अपनी परेशानियों का सामना करेंगे."
साथ होने की अपनी अलग ताकत है जो ख़ुशी देती है. शिल्पा कहती है कि "अब रोना बंद कर दिया है, रोने से निगेटिव भावनाएं आती हैं. इसलिए ज़िंदगी हंसकर जीने की ठानी है."
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2018 में दो वयस्कों के बीच मर्ज़ी से होनेवाली शादी में खाप पंचायतों के दख़ल को ग़ैर-क़ानूनी क़रार दे दिया.
कोर्ट का कहना था कि परिवार, समुदाय और समाज की मर्ज़ी से ज़्यादा ज़रूरी है, शादी के लिए लड़का और लड़की की रज़ामंदी.
खाप पंचायतों और परिवारों से सुरक्षा के लिए कोर्ट ने राज्य सरकारों को 'सेफ़ हाउस' बनाने की सलाह भी दी.
क़रीब छह महीने बाद गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर कोर्ट के दिशा-निर्दश लागू करने को कहा भी, लेकिन कुछ ही राज्यों ने अब तक 'सेफ़ हाउस' बनाए हैं.
शिल्पा और रविंद्र अब अपनी ज़िंदगी और फ़ैसलों के बारे में ख़ुलकर बात करते हैं. अंतरजातीय शादी करने की चाहत रखनेवाले कई और जोड़े अब उनसे सलाह लेते हैं.
पर ये जोड़े सामने नहीं आना चाहते. शायद उन्हें भी साथ होने की जद्दोजहद और ख़ौफ़ से निकलकर ताकत और ख़ुशी के अहसास तक का सफ़र फिलहाल ख़ुद ही तय करना है.
रविंद्र के मुताबिक़ अलग-अलग जाति के लोगों के बीच में शादी होना, उस बदलाव की ओर पहला कदम है जिससे देश में जाति के आधार पर भेदभाव ख़त्म हो जाएगा.
अब वो वक़ालत की पढ़ाई कर रहे हैं ताक़ि उन लोगों की मदद कर सकें जो पढ़े-लिखे नहीं हैं और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद नहीं कर पाते.
शिल्पा कहती हैं कि वो पहले वाली उस सिमटी-सकुचाई लड़की से बहुत आगे निकल आई हैं. वो कहती हैं, "अब मेरी ज़िंदगी के कुछ मायने हैं, शायद पापा भी ये देख पाएं कि मैंने सिर्फ़ मस्ती करने के लिए शादी नहीं की और वो मुझे ऐक्सेप्ट कर लें."
Wednesday, February 6, 2019
"मुझे जिस तरह का कैंसर हुआ था वो कभी भी वापस आ सकता है''
फ़िल्म 'आनंद' और 'सफ़र' में राजेश खन्ना का किरदार कैंसर का शिकार होता है और वो ज़िंदगी को अलविदा कहता है . उस ज़माने में भी कई सितारों ने अपनी ज़िंदगी कैंसर की वजह से खोई . पर वक़्त बदला है और ज़िंदगी की कहानी का 'द ऐंड' भी बदला . अब असल ज़िंदगी में बहुत से अभिनेता इस बीमारी से झूझ रहे हैं और उस से लड़ रहे हैं . एक हद तक कैंसर को हरा चुके हैं. 'वर्ल्ड कैंसर डे' पर जानते हैं किस कलाकार को कौन सा कैंसर हुआ.
सोनाली बेंद्रे पिछले साल कैंसर की गिरफ्त में आ गई थीं. सोनाली ने न्यूयार्क में इलाज के दौरान अपने फैंस के साथ ये खबर शेयर की थी. सोनाली ने अपने इंस्टाग्राम पर लेटेस्ट फोटो के साथ एक इमोशनल पोस्ट अपने फैंस के साथ शेयर किया है. इस पोस्ट में सोनाली ने बताया कि वो अब काम पर दोबारा वापसी कर चुकी हैं. सोनाली बेंद्रे को हाई-ग्रेड कैंसर हुआ था. मेटास्टेटिस कैंसर का मतलब ये है कि एक जगह कैंसर के सेल मौजूद नहीं हैं. जहां से कैंसर की उत्पत्ति हुई है, उससे शरीर के दूसरे अंग में वो फैल चुका होता है.हर कैंसर में मेटास्टेटिस का मतलब स्टेज 4 होता है. लेकिन हर कैंसर में स्टेज 4 जानलेवा ही हो, ये ज़रूरी नहीं है.
आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा ब्रेस्ट कैंसर से जंग लड़ रही हैं , रैंप पर चलीं
बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप ब्रेस्ट कैंसर से जंग लड़ रही हैं . शॉर्ट फ़िल्म डायरेक्टर ताहिरा कश्यप ने लैक्मे फैशन वीक में रैंप वॉक किया. खास बात ये है कि कैंसर से जूझ रहीं ताहिरा बाल्ड लुक में पूरे कॉन्फिडेंस के साथ रैंप पर नज़र आईं.
2018 में इरफ़ान खान ने बताया था कि वो एक ख़तरनाक बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' है. अपने इलाज के लिए इरफ़ान लंदन गये . एनएचएस डॉट यूके के मुताबिक़, 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' एक दुर्लभ किस्म का ट्यूमर होता है जो शरीर में कई अंगों में भी विकसित हो सकता है..इसका सबसे शुरुआती असर उन ब्लड सेल्स पर होता है जो ख़ून में हार्मोन छोड़ते हैं. ये बीमारी कई बार बहुत धीमी रफ़्तार से बढ़ती है. लेकिन हर मामले में ऐसा हो, ये ज़रूरी नहीं है.
मनीषा कोइराला को साल 2012 में गर्भाशय का कैंसर होने का पता लगा. मनीषा ने कैंसर को मात दी और अब वो ठीक होकर वापस अपने फ़ैंस के सामने हैं. वे कहती हैं, "मुझे जिस तरह का कैंसर हुआ था वो कभी भी वापस आ सकता है. लेकिन हर क़ीमत पर हमें पॉजिटिव रहना होता है. तभी हम इस बीमारी को हरा पाएंगे."
इसके बाद वो 'डियर माया' और 'संजू' जैसी फ़िल्मों मे नज़र आ चुकी हैं . मनीषा ने राजकुमार हिरानी की फ़िल्म 'संजू' में नरगिस दत्त के किरदार में नज़र आईं. नरगिस को पैंक्रियाटिक कैंसर था और वो उसकी वजह से वो ज़िंदगी से जंग हार गईं.
बॉलीवुड में एक और सेलिब्रिटी कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं. पूर्व अभिनेता और प्रोड्यूसर राकेश रोशन को कैंसर है . अभिनेता ऋतिक रोशन ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने पिता राकेश रोशन के साथ एक तस्वीर शेयर की. इस पोस्ट में उन्होंने पिता को कैंसर होने की बात लिखी है. उन्होंने बताया है कि कुछ हफ़्तों पहले ही उन्हें कैंसर होने का पता चला है और वो इसके शुरुआती स्तर पर हैं.
नफ़ीसा अली को पेरिटोनियल कैंसर है
एक्टर, पूर्व ब्यूटी क्वीन और राष्ट्रीय स्तर की स्वीमिंग चैम्पियन नफ़ीसा अली ने पिछले साल नवंबर में अपने इंस्टाग्राम पर बताया कि वो स्टेज 3 कैंसर से जूझ रही हैं.बाद में जानकारी मिली कि उन्हें पेरिटोनियल कैंसर है. इसके कुछ सेल ओवरी में भी पाए जाते हैं, जो शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकते हैं.बीमारी का पता चलने के बाद अब नफ़ीसा पूरे हौसले के साथ इससे लड़ रही हैं. लेकिन उनका कहना है कि उन्हें अब भी यक़ीन नहीं कि उन्हें कैंसर है.
हिंदी फ़िल्म 'बर्फी' के निर्देशक अनुराग बासु एक वक्त कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे.पर उनकी माने तो वो नहीं,कैंसर उनका सामना कर रहा था.
2004 में अनुराग बासु को पता चला कि वो ल्यूकीमिया नाम के कैंसर से पीड़ित हैं. उस वक्त वो फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' का निर्देशन कर रहे थे. बाद में ये फिल्म महेश भट्ट और मोहित सूरी ने पूरी की. तीन साल के इलाज के बाद अनुराग इस बीमारी से जीत पाए और उन्हें अमेरिकन कैंसर सोसायटी द्वारा कैंसर सर्वाइवर का अवॉर्ड भी दिया गया.
सोनाली बेंद्रे पिछले साल कैंसर की गिरफ्त में आ गई थीं. सोनाली ने न्यूयार्क में इलाज के दौरान अपने फैंस के साथ ये खबर शेयर की थी. सोनाली ने अपने इंस्टाग्राम पर लेटेस्ट फोटो के साथ एक इमोशनल पोस्ट अपने फैंस के साथ शेयर किया है. इस पोस्ट में सोनाली ने बताया कि वो अब काम पर दोबारा वापसी कर चुकी हैं. सोनाली बेंद्रे को हाई-ग्रेड कैंसर हुआ था. मेटास्टेटिस कैंसर का मतलब ये है कि एक जगह कैंसर के सेल मौजूद नहीं हैं. जहां से कैंसर की उत्पत्ति हुई है, उससे शरीर के दूसरे अंग में वो फैल चुका होता है.हर कैंसर में मेटास्टेटिस का मतलब स्टेज 4 होता है. लेकिन हर कैंसर में स्टेज 4 जानलेवा ही हो, ये ज़रूरी नहीं है.
आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा ब्रेस्ट कैंसर से जंग लड़ रही हैं , रैंप पर चलीं
बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप ब्रेस्ट कैंसर से जंग लड़ रही हैं . शॉर्ट फ़िल्म डायरेक्टर ताहिरा कश्यप ने लैक्मे फैशन वीक में रैंप वॉक किया. खास बात ये है कि कैंसर से जूझ रहीं ताहिरा बाल्ड लुक में पूरे कॉन्फिडेंस के साथ रैंप पर नज़र आईं.
2018 में इरफ़ान खान ने बताया था कि वो एक ख़तरनाक बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' है. अपने इलाज के लिए इरफ़ान लंदन गये . एनएचएस डॉट यूके के मुताबिक़, 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' एक दुर्लभ किस्म का ट्यूमर होता है जो शरीर में कई अंगों में भी विकसित हो सकता है..इसका सबसे शुरुआती असर उन ब्लड सेल्स पर होता है जो ख़ून में हार्मोन छोड़ते हैं. ये बीमारी कई बार बहुत धीमी रफ़्तार से बढ़ती है. लेकिन हर मामले में ऐसा हो, ये ज़रूरी नहीं है.
मनीषा कोइराला को साल 2012 में गर्भाशय का कैंसर होने का पता लगा. मनीषा ने कैंसर को मात दी और अब वो ठीक होकर वापस अपने फ़ैंस के सामने हैं. वे कहती हैं, "मुझे जिस तरह का कैंसर हुआ था वो कभी भी वापस आ सकता है. लेकिन हर क़ीमत पर हमें पॉजिटिव रहना होता है. तभी हम इस बीमारी को हरा पाएंगे."
इसके बाद वो 'डियर माया' और 'संजू' जैसी फ़िल्मों मे नज़र आ चुकी हैं . मनीषा ने राजकुमार हिरानी की फ़िल्म 'संजू' में नरगिस दत्त के किरदार में नज़र आईं. नरगिस को पैंक्रियाटिक कैंसर था और वो उसकी वजह से वो ज़िंदगी से जंग हार गईं.
बॉलीवुड में एक और सेलिब्रिटी कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं. पूर्व अभिनेता और प्रोड्यूसर राकेश रोशन को कैंसर है . अभिनेता ऋतिक रोशन ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने पिता राकेश रोशन के साथ एक तस्वीर शेयर की. इस पोस्ट में उन्होंने पिता को कैंसर होने की बात लिखी है. उन्होंने बताया है कि कुछ हफ़्तों पहले ही उन्हें कैंसर होने का पता चला है और वो इसके शुरुआती स्तर पर हैं.
नफ़ीसा अली को पेरिटोनियल कैंसर है
एक्टर, पूर्व ब्यूटी क्वीन और राष्ट्रीय स्तर की स्वीमिंग चैम्पियन नफ़ीसा अली ने पिछले साल नवंबर में अपने इंस्टाग्राम पर बताया कि वो स्टेज 3 कैंसर से जूझ रही हैं.बाद में जानकारी मिली कि उन्हें पेरिटोनियल कैंसर है. इसके कुछ सेल ओवरी में भी पाए जाते हैं, जो शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकते हैं.बीमारी का पता चलने के बाद अब नफ़ीसा पूरे हौसले के साथ इससे लड़ रही हैं. लेकिन उनका कहना है कि उन्हें अब भी यक़ीन नहीं कि उन्हें कैंसर है.
हिंदी फ़िल्म 'बर्फी' के निर्देशक अनुराग बासु एक वक्त कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे.पर उनकी माने तो वो नहीं,कैंसर उनका सामना कर रहा था.
2004 में अनुराग बासु को पता चला कि वो ल्यूकीमिया नाम के कैंसर से पीड़ित हैं. उस वक्त वो फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' का निर्देशन कर रहे थे. बाद में ये फिल्म महेश भट्ट और मोहित सूरी ने पूरी की. तीन साल के इलाज के बाद अनुराग इस बीमारी से जीत पाए और उन्हें अमेरिकन कैंसर सोसायटी द्वारा कैंसर सर्वाइवर का अवॉर्ड भी दिया गया.
Monday, February 4, 2019
नीतीश कुमार को DGP पद पर क्यों पसंद आए गुप्तेश्वर पांडे
बिहार पुलिस महकमे को जिस नियुक्ति का इंतजार था, वह गुरुवार को पूरा हो गया.
तमाम अटकलों के बीच बिहार सरकार के गृह विभाग की ओर से ये अधिसूचना जारी की गई कि बिहार पुलिस के नए डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे होंगे.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से बिहार सरकार को जिन तीन अफसरों के नाम भेजे गए थे, उनमें गुप्तेश्वर पांडेय का नाम भी था.
एक दिन पहले तक मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा जा रहा था कि डीजीपी बनने की रेस में सबसे आगे आरके मिश्रा हैं.
लेकिन मौजूदा डीजीपी के. एस द्विवेदी के विदाई समारोह से महज कुछ घंटों पहले सरकार के गृह विभाग ने गुप्तेश्वर पांडे के नाम का ऐलान कर सबको चौंका दिया.
गुप्तेश्वर पांडे के पुलिस करियर में इससे पहले भी कई मौके रहे हैं, जब उन्होंने लोगों को चौंकाया है.
मार्च, 2009 को पांडे के एक फ़ैसले ने तब सबको चौंका दिया था, जब उन्होंने पुलिस सेवा से रिटायरमेंट ली थी.
इस रिटायरमेंट के बाद लोगों को हैरानी तब हुई, जब वो ठीक नौ महीने बाद पुलिस सेवा में फिर से शामिल हो गए.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, राज्य में ये पहली बार हुआ था कि ख़ुद से रिटायरमेंट लिए एक अफसर को वापस सेवा में बहाल किया गया.
कहा जाता है कि गुप्तेश्वर पांडे बक्सर से चुनाव लड़ना चाहते थे और उन्हें टिकट का भरोसा भी मिला था लेकिन बाद में बात बनी नहीं और तब उन्होंने वापस सेवा में आने की अर्जी लगाई.
गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. पैतृक घर बिहार के बक्सर जिले में ही है.
दरअसल, इस बार बिहार में नए डीजीपी की नियुक्ति में पहली बार इतनी देर हुई है, क्योंकि यह नियुक्ति नए प्रावधानों के तहत की जानी थी.
नए प्रावधान की वजह से राज्य सरकार के पास सीमित अधिकार हैं.
सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार, अब राज्य में जो भी डीजीपी बनेगा वो अगले दो सालों तक इस पद पर बना रहेगा.
इसलिए ज़रूरी था कि वैसे अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जिसकी सेवा अवधि कम से कम दो साल बची हो.
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की वजह से भी संघ लोक सेवा आयोग और बिहार सरकार के बीच काफ़ी जिरह हुई.
पहले बिहार सरकार ने डीजी के पद पर तैनात बारह पुलिस अधिकारियों के नाम की सूची संघ लोक सेवा आयोग को भेजी.
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर में उन 12 नामों में से तीन नामों का चयन किया और फिर ये बिहार सरकार पर छोड़ दिया कि वो उनमें से किसको डीजीपी नियुक्त करती है.
बिहार के नए डीजीपी का कार्यकाल एक फ़रवरी 2019 से शुरू होगा.
स्थानीय मीडिया में बुधवार तक ये ख़बरें चल रही थीं कि डीजीपी की रेस में सबसे आगे आरके मिश्रा का नाम है. सुनील कुमार के नाम की भी चर्चा थी.
लेकिन, सरकार ने मौजूदा डीजीपी के कार्यकाल के आख़िरी घंटों में गुप्तेश्वर पांडेय के नाम पर मुहर लगाई.
तमाम अटकलों के बीच बिहार सरकार के गृह विभाग की ओर से ये अधिसूचना जारी की गई कि बिहार पुलिस के नए डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे होंगे.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से बिहार सरकार को जिन तीन अफसरों के नाम भेजे गए थे, उनमें गुप्तेश्वर पांडेय का नाम भी था.
एक दिन पहले तक मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा जा रहा था कि डीजीपी बनने की रेस में सबसे आगे आरके मिश्रा हैं.
लेकिन मौजूदा डीजीपी के. एस द्विवेदी के विदाई समारोह से महज कुछ घंटों पहले सरकार के गृह विभाग ने गुप्तेश्वर पांडे के नाम का ऐलान कर सबको चौंका दिया.
गुप्तेश्वर पांडे के पुलिस करियर में इससे पहले भी कई मौके रहे हैं, जब उन्होंने लोगों को चौंकाया है.
मार्च, 2009 को पांडे के एक फ़ैसले ने तब सबको चौंका दिया था, जब उन्होंने पुलिस सेवा से रिटायरमेंट ली थी.
इस रिटायरमेंट के बाद लोगों को हैरानी तब हुई, जब वो ठीक नौ महीने बाद पुलिस सेवा में फिर से शामिल हो गए.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, राज्य में ये पहली बार हुआ था कि ख़ुद से रिटायरमेंट लिए एक अफसर को वापस सेवा में बहाल किया गया.
कहा जाता है कि गुप्तेश्वर पांडे बक्सर से चुनाव लड़ना चाहते थे और उन्हें टिकट का भरोसा भी मिला था लेकिन बाद में बात बनी नहीं और तब उन्होंने वापस सेवा में आने की अर्जी लगाई.
गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. पैतृक घर बिहार के बक्सर जिले में ही है.
दरअसल, इस बार बिहार में नए डीजीपी की नियुक्ति में पहली बार इतनी देर हुई है, क्योंकि यह नियुक्ति नए प्रावधानों के तहत की जानी थी.
नए प्रावधान की वजह से राज्य सरकार के पास सीमित अधिकार हैं.
सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार, अब राज्य में जो भी डीजीपी बनेगा वो अगले दो सालों तक इस पद पर बना रहेगा.
इसलिए ज़रूरी था कि वैसे अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जिसकी सेवा अवधि कम से कम दो साल बची हो.
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की वजह से भी संघ लोक सेवा आयोग और बिहार सरकार के बीच काफ़ी जिरह हुई.
पहले बिहार सरकार ने डीजी के पद पर तैनात बारह पुलिस अधिकारियों के नाम की सूची संघ लोक सेवा आयोग को भेजी.
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर में उन 12 नामों में से तीन नामों का चयन किया और फिर ये बिहार सरकार पर छोड़ दिया कि वो उनमें से किसको डीजीपी नियुक्त करती है.
बिहार के नए डीजीपी का कार्यकाल एक फ़रवरी 2019 से शुरू होगा.
स्थानीय मीडिया में बुधवार तक ये ख़बरें चल रही थीं कि डीजीपी की रेस में सबसे आगे आरके मिश्रा का नाम है. सुनील कुमार के नाम की भी चर्चा थी.
लेकिन, सरकार ने मौजूदा डीजीपी के कार्यकाल के आख़िरी घंटों में गुप्तेश्वर पांडेय के नाम पर मुहर लगाई.
Friday, February 1, 2019
सड़क पर हुए छेद को आम गड्ढा समझते रहे लोग, जांच की तो सामने आई बैंक तक की सुरंग
अमेरिका के पेमब्रोक पाइन्स शहर की एक सड़क पर जिस गड्ढे को राहगीर आम टूट-फूट का नतीजा मान रहे थे, जांच में वह 150 फीट लंबी सुरंग निकली। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के मुताबिक, चोरों ने सुरंग को बैंक के बेसमेंट के पास तक खोद लिया था। अब पुलिस इसकी तलाश कर रही है।
सुरंग में मिला खुदाई का सामान
इस गड्ढे के बारे में पहली बार एक मोटरसाइकिल चालक ने शिकायत की थी। इसके बाद गड्ढे को भरने आए शहर के निर्माण विभाग को शक हुआ और जांच के लिए पुलिस और एफबीआई को बुलाया गया। करीब दो से तीन फीट चौड़ाई वाले इस गड्ढे के अंदर जाने पर पता चला कि यह टूट-फूट का नहीं, बल्कि चोरों की साजिश का नतीजा है। गड्ढे में घुसते ही सबसे पहले एक जनरेटर और बिजली का तार मिला। अंदर जाने पर एक सुरंग सामने आई, जिसमें सीढ़ियां, जूते और स्टूल भी मिले।
एफबीआई के एक जांचकर्ता के मुताबिक, चोर इस सुरंग से बैंक में लगे एटीएम तक पहुंचने वाले थे। अधिकारियों का मानना है कि इसे खोदने के लिए कोई गिरोह काम कर रहा था। हालांकि, राहगीरों की निगाह से बचकर कुल्हाड़ी से सड़क के नीचे खुदाई करना आश्चर्य की बात है।
एफबीआई अब ड्रोन की मदद से सुरंग की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, यह साफ नहीं है कि सुरंग का अंत हुआ भी है या नहीं। साथ ही लगातार बारिश की वजह से सुरंग का कुछ हिस्सा धंस चुका है।
पेमब्रोक पाइन्स के निर्माण विभाग ने इस मामले में कुछ भी बोलने से इनकार किया है। हालांकि, एफबीआई अधिकारियों को चोरों की तलाश है। कुछ संदिग्धों की फोटो भी जारी की गई हैं।
इस गोली को दो किस्म के हाइड्रोजेल से बनाया गया है। इसका अंदरूनी हिस्सा सोखने वाले पार्टिकल्स से, जबकि बाहरी हिस्सा सुरक्षात्मक झिल्ली से तैयार किया गया है।
दवा को स्थिरता देने के लिए इसे जैली से बनाया गया है। इसके चलते यह पेट में जल्द ही आकार बढ़ा लेगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि कैल्शियम के घोल को गोली से किसी भी समय हटाया जा सकता है।
शोधकर्ताओं ने लैब में गोली का प्रयोग किया। इसे पानी में डाला गया। पानी में पेट में पाए जाने वाले जठर रस भी मिलाए गए। 15 मिनट में ही गोली अपने मूल आकार से 100 गुना ज्यादा फूल गई।
फिलहाल इस गोली का सुअरों पर परीक्षण किया गया है। सुअर के पेट-आंतों की संरचना इंसान जैसी ही मानी जाती है। गोली में टेम्परेचर सेंसर लगाकर इसे सुअरों को खिलाया गया। गोली से पेट के अंदर की 30 दिनों की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
एमआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर शुआनहे झाओ का कहना है कि हमारा मकसद एक ऐसी स्मार्ट गोली तैयार करना था जिससे मरीज के पेट की स्थिति पर लंबे समय तक नजर रखी जा सके। इसमें लगे सेंसरों से बैक्टीरिया और वायरस की पहचान हो सकेगी। वैज्ञानिक गोली में एक सूक्ष्म कैमरा लगाने के बारे में भी विचार कर रहे हैं ताकि ट्यूमर में बढ़ोतरी देखी जा सके।
सुरंग में मिला खुदाई का सामान
इस गड्ढे के बारे में पहली बार एक मोटरसाइकिल चालक ने शिकायत की थी। इसके बाद गड्ढे को भरने आए शहर के निर्माण विभाग को शक हुआ और जांच के लिए पुलिस और एफबीआई को बुलाया गया। करीब दो से तीन फीट चौड़ाई वाले इस गड्ढे के अंदर जाने पर पता चला कि यह टूट-फूट का नहीं, बल्कि चोरों की साजिश का नतीजा है। गड्ढे में घुसते ही सबसे पहले एक जनरेटर और बिजली का तार मिला। अंदर जाने पर एक सुरंग सामने आई, जिसमें सीढ़ियां, जूते और स्टूल भी मिले।
एफबीआई के एक जांचकर्ता के मुताबिक, चोर इस सुरंग से बैंक में लगे एटीएम तक पहुंचने वाले थे। अधिकारियों का मानना है कि इसे खोदने के लिए कोई गिरोह काम कर रहा था। हालांकि, राहगीरों की निगाह से बचकर कुल्हाड़ी से सड़क के नीचे खुदाई करना आश्चर्य की बात है।
एफबीआई अब ड्रोन की मदद से सुरंग की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, यह साफ नहीं है कि सुरंग का अंत हुआ भी है या नहीं। साथ ही लगातार बारिश की वजह से सुरंग का कुछ हिस्सा धंस चुका है।
पेमब्रोक पाइन्स के निर्माण विभाग ने इस मामले में कुछ भी बोलने से इनकार किया है। हालांकि, एफबीआई अधिकारियों को चोरों की तलाश है। कुछ संदिग्धों की फोटो भी जारी की गई हैं।
इस गोली को दो किस्म के हाइड्रोजेल से बनाया गया है। इसका अंदरूनी हिस्सा सोखने वाले पार्टिकल्स से, जबकि बाहरी हिस्सा सुरक्षात्मक झिल्ली से तैयार किया गया है।
दवा को स्थिरता देने के लिए इसे जैली से बनाया गया है। इसके चलते यह पेट में जल्द ही आकार बढ़ा लेगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि कैल्शियम के घोल को गोली से किसी भी समय हटाया जा सकता है।
शोधकर्ताओं ने लैब में गोली का प्रयोग किया। इसे पानी में डाला गया। पानी में पेट में पाए जाने वाले जठर रस भी मिलाए गए। 15 मिनट में ही गोली अपने मूल आकार से 100 गुना ज्यादा फूल गई।
फिलहाल इस गोली का सुअरों पर परीक्षण किया गया है। सुअर के पेट-आंतों की संरचना इंसान जैसी ही मानी जाती है। गोली में टेम्परेचर सेंसर लगाकर इसे सुअरों को खिलाया गया। गोली से पेट के अंदर की 30 दिनों की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
एमआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर शुआनहे झाओ का कहना है कि हमारा मकसद एक ऐसी स्मार्ट गोली तैयार करना था जिससे मरीज के पेट की स्थिति पर लंबे समय तक नजर रखी जा सके। इसमें लगे सेंसरों से बैक्टीरिया और वायरस की पहचान हो सकेगी। वैज्ञानिक गोली में एक सूक्ष्म कैमरा लगाने के बारे में भी विचार कर रहे हैं ताकि ट्यूमर में बढ़ोतरी देखी जा सके।
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