Monday, February 4, 2019

नीतीश कुमार को DGP पद पर क्यों पसंद आए गुप्तेश्वर पांडे

बिहार पुलिस महकमे को जिस नियुक्ति का इंतजार था, वह गुरुवार को पूरा हो गया.

तमाम अटकलों के बीच बिहार सरकार के गृह विभाग की ओर से ये अधिसूचना जारी की गई कि बिहार पुलिस के नए डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे होंगे.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से बिहार सरकार को जिन तीन अफसरों के नाम भेजे गए थे, उनमें गुप्तेश्वर पांडेय का नाम भी था.

एक दिन पहले तक मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा जा रहा था कि डीजीपी बनने की रेस में सबसे आगे आरके मिश्रा हैं.

लेकिन मौजूदा डीजीपी के. एस द्विवेदी के विदाई समारोह से महज कुछ घंटों पहले सरकार के गृह विभाग ने गुप्तेश्वर पांडे के नाम का ऐलान कर सबको चौंका दिया.

गुप्तेश्वर पांडे के पुलिस करियर में इससे पहले भी कई मौके रहे हैं, जब उन्होंने लोगों को चौंकाया है.

मार्च, 2009 को पांडे के एक फ़ैसले ने तब सबको चौंका दिया था, जब उन्होंने पुलिस सेवा से रिटायरमेंट ली थी.

इस रिटायरमेंट के बाद लोगों को हैरानी तब हुई, जब वो ठीक नौ महीने बाद पुलिस सेवा में फिर से शामिल हो गए.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, राज्य में ये पहली बार हुआ था कि ख़ुद से रिटायरमेंट लिए एक अफसर को वापस सेवा में बहाल किया गया.

कहा जाता है कि गुप्तेश्वर पांडे बक्सर से चुनाव लड़ना चाहते थे और उन्हें टिकट का भरोसा भी मिला था लेकिन बाद में बात बनी नहीं और तब उन्होंने वापस सेवा में आने की अर्जी लगाई.

गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. पैतृक घर बिहार के बक्सर जिले में ही है.

दरअसल, इस बार बिहार में नए डीजीपी की नियुक्ति में पहली बार इतनी देर हुई है, क्योंकि यह नियुक्ति नए प्रावधानों के तहत की जानी थी.

नए प्रावधान की वजह से राज्य सरकार के पास सीमित अधिकार हैं.

सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार, अब राज्य में जो भी डीजीपी बनेगा वो अगले दो सालों तक इस पद पर बना रहेगा.

इसलिए ज़रूरी था कि वैसे अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जिसकी सेवा अवधि कम से कम दो साल बची हो.

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की वजह से भी संघ लोक सेवा आयोग और बिहार सरकार के बीच काफ़ी जिरह हुई.

पहले बिहार सरकार ने डीजी के पद पर तैनात बारह पुलिस अधिकारियों के नाम की सूची संघ लोक सेवा आयोग को भेजी.

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर में उन 12 नामों में से तीन नामों का चयन किया और फिर ये बिहार सरकार पर छोड़ दिया कि वो उनमें से किसको डीजीपी नियुक्त करती है.

बिहार के नए डीजीपी का कार्यकाल एक फ़रवरी 2019 से शुरू होगा.

स्थानीय मीडिया में बुधवार तक ये ख़बरें चल रही थीं कि डीजीपी की रेस में सबसे आगे आरके मिश्रा का नाम है. सुनील कुमार के नाम की भी चर्चा थी.

लेकिन, सरकार ने मौजूदा डीजीपी के कार्यकाल के आख़िरी घंटों में गुप्तेश्वर पांडेय के नाम पर मुहर लगाई.

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