आईपीएल-12 को शुरू हुए आज दो सप्ताह हो चुके हैं. दो सप्ताह के बाद कोलकाता नाइट राइडर्स अंक तालिका में पहले स्थान पर है.
रविवार को खेले गए दूसरे मुक़ाबले में उसने राजस्थान रॉयल्स को आठ विकेट से ऐसे हराया जैसे वह उसके बांए हाथ का खेल था.
आख़िरकार उसने जीत के लिए केवल 140 रनों का लक्ष्य 13.5 ओवर में ही महज़ दो विकेट खोकर हासिल कर लिया.
जिस पिच पर टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी की दावत पाकर राजस्थान के बल्लेबाज़ों को सांप सूंघ गया और वह निर्धारित 20 ओवर खेलकर तीन विकेट खोकर 139 रन ही बना सकी उसी पिच पर कोलकाता ने दिखाया कि बल्लेबाज़ी कैसे की
जाती है.
जीत के लिए 140 रनों की तलाश में कोलकाता ने क्रिस लिन और सुनील नारायण के साथ ज़ोरदार शुरूआत की .
इन दोनों ने पहले विकेट के लिए 91 रन जोड़कर राजस्थान रॉयल्स के गेंदबाज़ों के लिए मुश्किल पैदा कर दी.
क्रिस लिन ने केवल 32 गेंदों पर छह चौके और तीन छक्कों की मदद से 50 और सुनील नारायण ने भी 25 गेंदों पर छह चौके और तीन छक्कों के सहारे 47 रन ठोक ड़ाले.
उसके पास सुनील नारायण जैसा अनोखा सलामी बल्लेबाज़ है जो अपनी रहस्यमयी गेंदबाज़ी के लिए जाना जाता है लेकिन जब उनका बल्ला बोलता है तो अच्छे-अच्छे गेंदबाज़ भी पानी भरने लगते है.
इसके अलावा रविवार को 50 रन बनाने के अलावा क्रिस लिन ने पिछले मैच में भी बैंग्लोर के ख़िलाफ़ 31 गेंदों पर महत्वपूर्ण 43 रन बनाए.
कोलकाता के रोबिन उथप्पा भी इस बार छुपे रूस्तम ही साबित हुए हैं.
उन्होंने हैदराबाद के ख़िलाफ़ 35, पंजाब के ख़िलाफ़ नाबाद 67, बैंग्लोर के ख़िलाफ़ 33 और रविवार को राजस्थान के ख़िलाफ़ नाबाद 26 रन बनाए.
मज़बूत कंधों के मालिक रसेल ने पिछले मैच में विराट कोहली की कप्तानी में खेल रही बैंग्लोर के ख़िलाफ़ केवल 13 गेंदों पर एक चौके और सात छक्कों की मदद से नाबाद 48 रनों की ऐसी पारी खेली जिसे इस सीज़न की सबसे आकर्षक और
बेहद रोमांचकारी पारी माना जा सकता है.
रसेल का बल्ला ऐसा बोला कि उसने जीत की राह की तरफ बढ़ रही बैंग्लोर को हार के मुंह में घकेल दिया.
बेहद मुश्किल हालात से मैच निकाल लेने की रसेल की क्षमता इससे पहले भी इस आईपीएल में दिखी है.
उन्होंने दिल्ली के ख़िलाफ़ 62, पंजाब के ख़िलाफ़ 48 और हैदराबाद के ख़िलाफ़ नाबाद 48 रन बनाकर अपना अहम योगदान दिया.
उन्हें लेकर वेस्ट इंडीज़ के पूर्व कप्तान ब्रायन लारा ने भी कहा है कि अगर रसेल के साथ 10 खिलाड़ी और जोड़ दिये जाए तो वेस्ट इंडीज़ की विश्व कप की टीम तैय्यार है.
और नीतीश राणा का भी क्या कहना. उन्होंने बैंग्लोर के ख़िलाफ़ 37, पंजाब के ख़िलाफ़ 63 और हैदराबाद के ख़िलाफ़ 68 रन बनाए.
अब अगर जिस टीम के पास सलामी जोड़ी से लेकर नम्बर पांच-छह तक बेहद आक्रामक और समझदारी के अलावा किसी भी परिस्थिति में मैच को जीता देने वाली क्षमता वाले बल्लेबाज़ हो तो फिर कप्तान दिनेश कार्तिक क्यों चिंता करे.
गेंदबाज़ी में कोलकाता के पास भले ही हैरतअंगेज़ गेंदबाज़ नहीं हैं लेकिन फिर भी कुलदीप यादव और अनुभवी पियूष चावला हैं.
यह ऐसे स्पिनर हैं जो किसी भी बल्लेबाज़ को बांध कर रख सकते हैं.
अभी तो ख़ैर अपने बल्लेबाज़ों के दम पर कोलकाता दो सप्ताह में अपना दमख़म दिखाने में कामयाब रही है.
ज़ाहिर है इन दिनों कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक शाहरुख ख़ान भी खुश ही होंगे.
वैसे भी कोलकाता आईपीएल में दो बार, यानी साल 2012 और 2014 में चैंपियन रह चुकी है.
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